राष्ट्रीय अनुसंधान प्रतिष्ठान (NRF) बने सभी विधाओं हेतु समावेशी : अभाविप

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राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में घोषित राष्ट्रीय अनुसंधान प्रतिष्ठान को सभी शिक्षण विधाओं एवं शोध क्षेत्रों हेतु समावेशी व सर्वस्पर्शी बनाने की माँग अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद करती है।


पटना (विसंके)। शिक्षा नीति के क्रियान्वयन की दृष्टि से राष्ट्रीय अनुसंधान प्रतिष्ठान की स्थापना के लिए भारत के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. के. विजयराघवन की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है। अकादमिक क्षेत्र में विषय उठा है कि राष्ट्रीय अनुसंधान प्रतिष्ठान को केवल विज्ञान तक ही सीमित नहीं रखना चाहिए बल्कि इसके दायरे को विज्ञान, मानविकी, कला और संस्कृति के क्षेत्रों तक विस्तृत किया जाना चाहिए। अभाविप का मानना है कि भारत में अनुसंधान के सभी पहलुओं, चाहे वह स्वदेशी रक्षा अनुसंधान, अंतरिक्ष अनुसंधान, कृषि अनुसंधान, चिकित्सा अनुसंधान या कपड़ा अनुसंधान हो, को वित्तपोषण, परामर्श और निर्माण के लिए राष्ट्रीय अनुसंधान प्रतिष्ठान के अंतर्गत शामिल किया जाना चाहिए ताकि देश में ‘अनुसंधान की गुणवत्ता’ को बढ़ाया जा सके। सामाजिक-सांस्कृतिक क्षेत्र जैसे ग्रामीण परिस्थितिकी और पर्यावरण अनुसंधान, सामाजिक सरोकार, पारंपरिक इतिहास आदि जैसे अनुसंधानों में काफी संभावनाएं हैं।

यह महसूस किया जा रहा है कि वर्तमान प्रारूप को क्रियान्वयन की ओर ले जाने में हो रहे मंथन में समग्र दृष्टिकोण को बढ़ाना चाहिये और इसलिए विभिन्न पृष्ठभूमि और शिक्षा-शोध क्षेत्रों से आने वाले विद्वानों और शिक्षाविदों को इस प्रक्रिया में शामिल किया जाना चाहिए ताकि समग्र दृष्टिकोण के साथ बेहतर राष्ट्रीय अनुसंधान प्रतिष्ठान खड़ा किया जा सके। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 द्वारा परिकल्पित राष्ट्रीय अनुसंधान प्रतिष्ठान के समावेशी जनादेश को पूरा करने के लिए सभी विषयों के हितधारकों और विद्वानों को आमंत्रित करना चाहिए।

अभाविप की राष्ट्रीय महामंत्री सुश्री निधि त्रिपाठी जी ने कहा, “राष्ट्रीय अनुसंधान प्रतिष्ठान का उद्देश्य देश में सभी धाराओं में काम करने वाले शोधकर्ताओं को सशक्त बनाना है। इस वर्ष के बजट में राष्ट्रीय अनुसंधान प्रतिष्ठान के लिए 50 हजार करोड़ रुपये आवंटित होने से, यह अत्यंत महत्त्वपूर्ण हो जाता है कि अनुसंधान के सभी क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाए जिससे की देश में अंततः अनुसंधान की गुणवत्ता में सुधार हो। हम चाहते हैं कि प्रतिष्ठान के गठन के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण अपनाया जाए ताकि इसके निर्माण के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके।”

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