हॉस्टल में रहना है तो बुर्का पहनना होगा, भागलपुर के गर्ल्स हॉस्टल की अधीक्षक का तालीबानी फरमान

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भागलपुर (विसंके)। तालीबान सिर्फ अफगानिस्तान और पाकिस्तान में ही सक्रिय नहीं है। बल्कि यह मानसिकता बिहार में भी कुछ लोगों के जेहन में है। तिलका मांझी विश्वविद्यालय, भागलपुर के गल्र्स हॉस्टल की अधीक्षक नाहिदा नसरीन ने एक तालीबानी फरमान जारी किया है। इस छात्रावास में रहने वाली लड़कियों को बुर्का पहनना अनिवार्य किया गया है। उन्हें भीषण गर्मी और उमस वाली बरसात में भी हॉस्टल के अंदर ट्राउजर पहनने पर रोक लगाया गया है। इस तालीबानी सोच वाली महोदया का मन इतने से नहीं भरा। उन्होंने हॉस्टल से रहने वाली छात्राओं को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे फोन और स्कूटी वाली छात्राओं से दूर रहें। अधीक्षक के इस फरमान के बाद छात्राओं ने 10 सितंबर को विरोध प्रदर्शन भी किया।

तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के अन्तर्गत बी. एन. कॉलेज के पास अल्पसंख्यक गल्र्स हॉस्टल है। अल्पसंख्यक छात्रावास होने के कारण इसमें न सिर्फ मुस्लिम, बल्कि सिख, ईसाई, बौद्ध मतावलंबी भी रहते हैं। मुस्लिम पंथ के अलावा अन्य में बुर्का पहनने की कोई प्रथा नहीं है। लेकिन, हॉस्टल अधीक्षक के आदेश का खामियाजा इन सभी छात्राओं को भुगतना पड़ रहा है। भागलपुर की पहचान सिल्क सिटी के रूप में भी है। इस अधीक्षक के खिलाफ कई मामले समय-समय पर आते रहते हैं।

विवादों में रही है हॉस्टल अधीक्षक


अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के दिशा-निर्देशों पर यह हॉस्टल चलता है। इस हॉस्टल का संचालन मार्च, 2019 तक तिलका मांझी विश्वविद्यालय के अन्तर्गत था। बाद में विश्वविद्यालय ने इसके संचालन से इंकार कर दिया क्योंकि यह हॉस्टल विश्वविद्यालय को नहीं सौंपा गया था। विश्वविद्यालय के इस फैसले की जानकारी जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने 27 अप्रैल, 2019 को मुख्यालय को दी। पूरे मामले को देखते हुए विभाग के तत्कालीन निदेशक फैजल ने अधीक्षक को पद पर बनाये रखने का निर्देश जारी किया था। निदेशक के निर्देशानुसार ही विभागीय गाईडलाइन के अनुसार हॉस्टल संचालन के लिए जिला संचालन समिति का गठन किया गया। जिला के उप विकास आयुक्त (डीडीसी), जिला अल्पसंख्यक कल्याण पदाधिकारी, एमएम कॉलेज की प्राचार्य, सबौर कॉलेज के अर्थशास्त्र के विभागाध्यक्ष और एक अन्य शिक्षक को इस समिति में शामिल किया गया था। इसके अध्यक्ष उप विकास आयुक्त बनाये गये थे। समिति ने 2020 में हॉस्टल अधीक्षक नसरीन की लगातार आ रही शिकायतों को देख उन्हें पद से हटाने की अनुशंसा की। लेकिन, विभाग के निर्देश पर बनाये गये समिति के अनुशंसा को भी दरकिनार कर दिया गया और नाहिदा नसरीन अपने पद पर बनी रही। विभाग द्वारा दिये गये छूट का ही नतीजा है कि नसरीन की मनमानी बढ़ती चली गयी। वर्तमान में दिये गये तालीबानी निर्देश इसकी एक बानगी है।

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