छात्रों में छिपी प्रतिभा को निखार कर समाज के सामने लाना हीं समर कैम्प का उद्देश्य : मुकेश नंदन

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मुंगेर (विसंके)। विद्या भारती छात्र-छात्राओं के सर्वांगीण विकास जिसमें शारीरिक, प्राणिक, मानसिक, बौद्धिक आध्यात्मिक विकास हो को ध्यान में रखकर इस समर कैम्प का आयोजन कर रही है। अभिभावक भी चाहते हैं कि बच्चे पढ-लिखकर अपने परिवार और राष्ट्र का नाम रौशन करे। हमारे आचार्य और समिति के लोग भी यही चाहते हैं कि अधिक से अधिक संसाधन उपलब्ध करा कर छात्रों को अच्छी शिक्षा दे सके। इसके लिए प्रांतीय समितियां भी विभिन्न प्रकार की योजनाएं बनाती है ताकि छात्र-छात्राओं का समुचित विकास हो सके। उक्त बातें भारती शिक्षा समिति/शिशु शिक्षा प्रबंध समिति, बिहार द्वारा आयोजित छः दिवसीय ऑनलाइन समर कैम्प के दूसरे दिन बाल वर्ग की बहनों को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि विद्या भारती उत्तर-पूर्व क्षेत्र के सचिव मुकेश नंदन ने कही।

उन्होने कहा कि इस समर कैम्प में हजारों की संख्यां में बिहार से छात्र-छात्राएं सम्मिलित हो रहें हैं जिसमें बच्चों के शैक्षिक गतिविधि को छोड़ कर गैर शैक्षणिक गतिविधियों जैसे- भजन संध्या, गीत-संगीत, प्रश्नमंच आदि का प्रस्तुतिकरण हो रहा है जिससे उन्हें मन भी लग रहा है और उनके अंदर अन्य गतिविधियों का भी विकास हो रहा है। इस कारण उनके अंदर छिपी हुई प्रतिभा भी निखर कर बाहर आ रही है। बच्चे के साथ-साथ अभिभावक भी गर्मी छुट्टी का आनंद उठा रहे हैं। इस प्रकार के कार्यक्रम को लेकर बच्चों एवं अभिभावकों में उत्साह का वातावरण है।

मौके पर उपस्थित अतिथि के रूप में शालिनी सिन्हा ने कहा कि हमारी भारतीय संस्कृति और सभ्यता विश्व में सबसे प्राचीन सभ्यता है। संस्कृति का अर्थ संस्कार, सुधार, शुद्धि, सजावट आदि होता है। वैदिक युग में हमें भारतीय संस्कृति का सर्वाधिक व्यवस्थित रूप देखने को मिलता है। भारतीय विचारक सम्पूर्ण विश्व को एक परिवार के रूप में मानते हैं। भारतीय संस्कृति में विविधता में एकता का प्राचीन स्वरूप आज भी विद्यमान है। हमारी संस्कृति हमें सुख और उल्लासपूर्ण, संयम और दुःख में धीरज धरने के शिक्षा देती है।

उपस्थित प्रतिभागियों को कार्यक्रम प्रमुख आचार्या रूपम रानी एवं बहन तेजस्विनी के द्वारा दैनिक जीवन में घरेलू चीजों से अपने सौंदर्य को बरकरार रखने के लिए बहुत सारे महत्वपूर्ण टिप्स और उससे जुड़ी सामग्रियों के बारे में करके बताया गया। वहीं कक्षा दशम की छात्रा  अनुष्का शर्मा के द्वारा स्पोकेन अंग्रेजी के महत्व और शब्दों के उच्चारण से संबंधित विस्तृत जानकारी दी गई।

वहीं बाल वर्ग के भैया को संबोधित करते हुए विशिष्ट अतिथि विद्या भारती उत्तर-पूर्व क्षेत्र के सहसचिव गोपेश कुमार घोष ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गायन, वादन एवं नर्तन का अभी भी जन्म से लेकर मृत्यु तक विशिष्ट स्थान है। यह हमारी भावना को व्यक्त करता है। पर्व-त्योहार, जन्म, विवाह या विदाई का अवसर हो संगीत उपयुक्त माहौल बनाने में सहायक होता है। यह एक अभ्यास का चीज है।

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वहीं मुख्य अतिथि प्रो. अंजनी कुमार सुमन ने कहा कि गायन का संबंध प्रकृति से है और प्रकृति में हमेशा एक अंतर्नाद होता है जिसे ॐ की ध्वनि कहते हैं। और यह अंतर्नाद आप अपने को जब किसी शांत जगह में पाएंगे तब इसका अनुभव करेंगे जो कि आपको शाश्वत आनंद की ओर ले जाती है। वेद की भी सभी ऋचाओं को गा कर रची गई है। भारत की इस पुण्यभूमि में हमने देवताओं को भी प्रसन्न करने के लिए गायन का हीं सहारा लिया हे।

इस कार्यक्रम में बहन आर्या सिंह, भैया प्रिंस कुमार, मन्नु कुमार एवं भैया अभिलाष आनंद द्वारा संगीत में गायन एवं वादन की विधियों एवं स्वरों के बारे में प्रायोगिक रूप से करके वहीं बहन वैशाली, प्राची एवं विदिशा द्वारा कथ्थक, भांगड़ा और गढ़वा नृत्य करके एक अच्छा नर्तक बनने के गुण के बारे में बताया गया। अतिथि परिचय कार्यक्रम की संयोजिका पाणिनी मिश्रा एवं संयोजक संजीव कुमार झा तथा मंच का संचालन बहन शिप्रा लाल एवं बहन प्रियदर्शिनी के द्वारा किया गया।

इस विशेष अवसर पर भारती शिक्षा समिति/ शिशु शिक्षा प्रबंध समिति बिहार, के प्रदेश सचिव, प्रकाश चंद्र जायसवाल, कार्यक्रम के मार्गदर्शक ब्रह्मदेव प्रसाद, बिनोद कुमार, प्रधानाचार्य अनंत कुमार सिन्हा, कार्यक्रम सहायक खुशबू झा, तकनीकी सहायक नरेश कुमार पहुजा एवं आलोक कुमार सिन्हा के साथ विद्या भारती दक्षिण बिहार के अनेक अधिकारीगण उपस्थित थे।

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