संकट की घड़ी में एक बार फिर संघ के स्वयंसेवक दे रहे लोगों का साथ

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अंतिम संस्कार के लिए सहयोग करने पहुंच रहे संघ के स्वयंसेवक


नई दिल्ली. कोरोना की दूसरी लहर एक नई वीभीषिका के रूप में लोगों के समक्ष चुनौती बन गई है. दिल्ली में कोविड-19 का दंश सबसे अधिक देखने को मिल रहा है. इस बीच दिल्ली प्रांत के स्वयंसेवक विगत वर्ष की तरह इस बार भी जरुरतमंदों की सहायता के लिए आगे आए हैं. दिल्ली प्रांत द्वारा कोरोना की दूसरी लहर से लोगों को बचाने और संक्रमित लोगों तथा उनके परिजनों को सहयोग प्रदान करने के लिए लगभग एक दर्जन प्रकार के सेवा कार्य प्रारंभ किए गए हैं. दिल्ली प्रांत के सभी छह विभागों में यह सेवा कार्य इन दिनों संचालित किए जा रहे हैं. सभी सेवा कार्यों के लिए अलग-अलग स्वयंसेवकों की टोली सक्रिय है.

एक तरफ जहां दिल्ली में ऑक्सीजन का संकट भयावह तस्वीर पेश कर रहा है, वहीं संघ के स्वयंसेवकों ने कुछ दिनों के भीतर ही 497 ऑक्सीजन सिलेंडर वितरित किए हैं. मास्क, सैनेटाइजर और राशन वितरण के साथ रक्त और प्लाज्मा डोनेशन का अभियान भी समानांतर रूप से चल रहा है. रक्तदान और प्लाज्मा दाने के लिए संभावित डोनर की सूची भी तैयार की गई है. 10 स्थानों पर रक्तदान संपन्न किया गया, 238 संभावित रक्तदाताओं की सूची भी तैयार की गई है. इसी तरह 31 यूनिट प्लाज्मा भी दान की गई है. 134 नगरों में काढ़ा वितरण का कार्य किया जा चुका है.

विगत वर्ष की भांति इस वर्ष भी संघ द्वारा राशन वितरण जगह-जगह पर किया जा रहा है. अब तक 62 नगरों में 9,523 पैकेट भोजन वितरित किए गए हैं. सरकारी कोविड केयर संटरों में भी कार्यकर्ता स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों का सहयोग प्रदान कर रहे हैं. पूरे प्रान्त में 4579 स्वंयसेवक अलग-अलग सेवाकार्यों में सक्रिय भूमिका निर्वहन कर रहे हैं.

हेल्पलाइन सेवा, सरकारी कोविड केयर सेंटर में सहयोग, ऑक्सीजन वितरण, ऑनलाइन चिकित्सा परामर्श, संक्रमित परिवार व व्यक्तियों को भोजन, रक्तदान, प्लाज्मादान, आयुर्वेदिक काढ़ा-होम्योपैथिक दवाई वितरण, अंतिम संस्कार में सेवा, मास्क सेनेटाइजर वितरण, बुजुर्गों की संभाल, वैक्सीनेशन के लिए जागरुकता अभियान, योग का प्रचार प्रसार समेत अनेक राहत कार्य संचालित किए जा रहे हैं.

अंतिम संस्कार में सहयोग कर रहे संघ के स्वयंसेवक


दिल्ली में जिस तरह कोविड-19 से मृतकों की संख्या बढ़ती जा रही है, उसी अनुपात में ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जिनमें परिजनों को उनके अपने व्यक्ति के अंतिम संस्कार में सहयोग के लिए लोग नहीं मिल रहे हैं. ऐसे में संघ के स्वयंसेवक सूचना मिलते ही इन परिवारों की मदद के लिए आगे आए हैं. आधा सैकड़ा से अधिक अंतिम संस्कार कार्यक्रमों में संघ के स्वयंसेवक ने मौके पर पहुंचकर लोगों की मदद की.

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