इमारत-ए-शरिया के कार्यकारी महासचिव द्वारा कुकर्म की कोशिश

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पटना (विसंके)। बिहार, उड़ीसा और झारखंड के मुसलमानों की सबसे बड़ी एदारा ‘इमारत-ए-शरिया’ के कार्यवाहक नाजिम शिबली कासमी पर कुकर्म का मामला दर्ज हुआ है। नाजिम महासचिव को कहा जाता है। यह अध्यक्ष के बाद सबसे महत्वपूर्ण पद है और सभी कार्यों की देख-रेख नाजिम के अंतर्गत होती है। पीड़ित महिला ने अपने लिखित आवेदन में पुलिस को बताया है कि वह इमारत-ए-शरिया में खाना बनाने का काम करती थी। एक दिन इस नाजिम ने उनको घर आने को कहा। इसी दौरान मौलाना ने उसके बच्चे को बाहर भेज दिया और कमरे का दरवाजा बंद कर उसके साथ गलत काम करने की कोशिश की। महिला के लाख रोने-गिड़गिड़ाने का मौलाना पर कोई असर नहीं हुआ। मौलाना को वह भाई कहकर अपने अस्मत बचाने के लिए गिड़गिड़ाती रही। लेकिन, मौलाना उसे पत्नी और स्वयं को पति मान रहा था।
यह मामला गत वर्ष 22 अप्रैल, 2020 का है। लाॅकडाउन के समय वह काफी परेशान थी और इसी दौरान काम के सिलसिले में मोहम्मद शिबली कासमी से मिली। मौलाना ने उसे घर पर बुलाया। वह 22 अप्रैल को सुबह 6 बजे बुधवार के दिन करबला जामा मस्जिद के पास स्थित उसके घर के पास पहुंची। वह अपने बच्चे को लेकर घर गयी थी। घर पर शिबली अकेले था। उसने पीड़िता के बच्चे को रूम से निकाल दिया और अंदर से गेट बंद कर दिया। पीड़िता के साथ जबर्दस्ती कर उसने उसके वस्त्र खोल दिये। पीड़िता किसी तरह उसके चंगुल से भाग गयी। जब वह उसके चंगुल से किसी तरह छूटी तो शिबली ने पजामा फेंक कर उसे दिया। उस समय से वह लगातार पीड़िता को जान से मारने की धमकी दे रहा है। इस सिलसिले में उसने इमारत-ए-शरिया के लोगों से भी बात की ताकि न्याय मिल सके। लेकिन, किसी ने उसका साथ नहीं दिया। उसके शौहर (पति) ने भी उसका साथ छोड़ दिया। थक-हारकर वह पुलिस की शरण में आयी। 18 मार्च, 2021 को उसके लिखित आवेदन पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया। शिबली के खिलाफ महिला थाना में आईपीसी की धारा 354 (बी) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।
इमारत-ए-शरिया एक सौ साल पुराना संगठन है। 1921 में इसकी स्थापना मुसलमानों को शरिया के तहत आनेवाले मुद्दों को समझाने के लिए बनाया गया था। यह संगठन पैगम्बर मोहम्मद की सुन्नत को अपना पथ-प्रदर्शक मानता है। यह मुसलमानों को कलमे की बुनियाद पर और शरीयत के तहत संगठित और अनुशासित करने के उद्देश्य से काम कर रहा है। इस संगठन की कोशिश है कि लोगों का ध्यान धर्म की ओर केन्द्रित हो और मुसलमानों को पारिवारिक हकों व सामाजिक कत्र्तव्यों की जानकारी मिल सके। इसकी तीन प्रमुख कमिटियां हैं, जिसमें- मजलिस-ए अरबाब-ए- हल्लोअवद, मजलिस-ए-शूरा और मजलिस-ए-आमला शामिल है। आज यह बिहार, उड़ीसा और झारखंड के मुसलमानों का सबसे बड़ा संगठन है। संस्था द्वारा अस्पताल और विद्यालय भी चलाये जाते हैं। आधुनिक शिक्षा से वंचित रहने वाले मुस्लिम लोगों को शिक्षा और मरीजों की इलाज के लिए अस्पताल की व्यवस्था भी की जाती है। संस्था को मुसलमानों की आवाज समझा जाता है।
कई ज्वलंत मुद्दों पर इमारत-ए-शरिया ने अपनी राय स्पष्ट की है। 2016 में इमारत-ए-शरिया की पहल पर पटना के गांधी मैदान में काफी संख्या में मुस्लिम इकत्रित हुए थे। उस समय मुद्दा था कि तीन तलाक जैसे मुद्दों को लेकर इस्लाम को खतरे में डाला जा रहा है। पिछले वर्ष नागरिका संशोधन कानून के विरोध में फुलवारी शरीफ में वाम दलों द्वारा बुलायी गई मानव श्रृंखला में इमारत-ए-शरिया ने हिस्सा लिया था। इसके अलावा 5 अगस्त, 2020 को अयोध्या में राम मंदिर का भूमिपूजन होने पर भी संस्था के मौलाना वली रहमानी ने नाराजगी जतायी थी। संस्था के इतिहास में यौन प्रताड़ना के मामले अभी तक सामने नहीं आये थे। यह पहला मौका है जब किसी महिला ने संस्था के किसी अधिकारी पर यौन प्रताड़ना का कोई केस दर्ज किया है। कार्यकारी नाजिम मौलाना मो. शिबली अल-कासमी के तथाकथित कुकर्मों की जांच शुरु हो गई है।

– संजीव कुमार

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