माडीपुर के मैकेनिक की ‘डाॅक्टर बिटिया’

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– संजीव कुमार

कहते हैं कि मन में अगर हिम्मत हो, सच्ची लगन हो तो हिमालय की ऊंचाई भी छोटी साबित हो सकती है। मुजफ्फरपुर की रहने वाली आकांक्षा ने इसे चरितार्थ किया है। आकांक्षा के पिता दिनेश सिंह मुजफ्फरपुर के माडीपुर में बाइक रिपेयरिंग का छोटा कारोबार चलाते हैं। मूलरूप से मधुबनी के रहने वाले दिनेश सिंह लगभग दो दशक पहले मुजफ्फरपुर में आकर बस गये। अपना काम ईमानदारी से करते हुए उन्होंने बच्चों की परवरिश की।
दिनेश सिंह के तीन बच्चे थे। कारोबार भले छोटा था लेकिन, सपने बड़े थे। उनकी इच्छा थी कि उनके बच्चे भी पढ़-लिखकर अच्छा बने। अपनी छोटी कमाई से ही उन्होंने बच्चों को अच्छी शिक्षा दी। पत्नी रेणु सिंह का पूरा सहयोग बच्चों की परवरिश में मिला। आज इसी का परिणाम है कि उनके तीनों बच्चे काफी अच्छा कर रहे हैं। बड़ा लड़का दिवाकर वाराणसी से इंजीनियरिंग कर चुका है। छोटा लड़का उज्ज्वल आईआईटी, रूड़की से इंजीनियरिंग कर रहा है। इन दोनों होनहार भाईयों की छोटी बहन ने भी भाईयों की नक्शे कदम पर चलते हुए इस वर्ष मेडिकल की नेशनल इलिजिबलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट यानि ‘नीट’ की परीक्षा उत्तीर्ण की है।
अपनी मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर आकांक्षा ने पहले प्रयास में ही नीट में 1547वां रैंक हासिल किया है। नियमित 9 से 10 घंटे पढ़ाई करने वाली आकांक्षा की अभिलाषा है कि वो दिल्ली के मौलाना आजाद मेडिकल काॅलेज या लेडी हार्डी मेडिकल काॅलेज से पढ़ाई करे। आकांक्षा ने दसवीं और बारहवीं की पढ़ाई मुजफ्फरपुर की एक स्थानीय स्कूल से ही की है।

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