सीखने की कोई उम्र नहीं होती : अम्बष्ठा

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जैसा कि हम कहते हैं कि “सीखने की कोई उम्र नहीं होती” यानी कि जीवन के किसी भी मोड़ पर हम कुछ भी सीख सकते हैं। हम यदि प्राचीन ग्रंथों का अध्ययन करें तो पता चलता है कि मां के गर्भ में स्थित शिशु भी सीखने का प्रयास करता है, तभी तो सुभद्रा के गर्भ में रह कर अभिमन्यु ने चक्रव्यूह-बेधन की कला सीख ली थी। सीखता वह है, जो स्वयं को अपूर्ण मानता है। जीवन की डगर में कब किस ज्ञान की कहां आवश्यकता आ पड़े, कोई नहीं जानता। सीखने के लिए किसी अवसर को खोजने की जरुरत नहीं है। जिसे सीखने की भूख है वह प्रत्येक व्यक्ति और प्रत्येक घटना से कुछ न कुछ सीख लेता है। ज्ञान की न तो कोई सीमा है और न हीं अंत।
हमने कुछ भी सीखने की उम्र खुद ही तय कर रखी है। जैसे की पढ़ाई- लिखाई, गाड़ी या साइकिल चलाना, तैराकी सीखना आदि। इन सबों के लिए हमारे मन में यही धारणा है कि शुरुआती दौर में इन्हें सीख लो तो ठीक लेकिन बढ़ती उम्र के साथ इनको सीखने की गुंजाइश कम होती जाती है। लेकिन फिर भी दुनिया में ऐसे भी लोग है जो अपने अंदर की सीखने की इच्छा को मरने नहीं देते और उम्र के ऐसे पड़ाव में नई चीजें सीख जाते हैं जो दूसरों के लिए प्रेरणा बन जाता है।
उक्त बातें जमालपुर के निवासी एवं अवकाश प्राप्त सैन्य अधिकारी एल0 जे0 एन0 वर्मा के बारे में जानकारी देते हुए राकेश नारायण अम्बष्ठा ने कही।
आगे उन्होंने कहा कि ऐसे हीं हैं छोटी केशोपुर, जमालपुर के निवासी मास्टर वारंट अफसर एल0 जे0 एन0 वर्मा। इन्होंने लगातार 40 वर्षों तक भारतीय वायु सेना में रहकर देश की सेवा की। भारतीय वायुसेना में इन्होंने इंटर पास कर अपना योगदान दिया था। अपने सेवा काल के दौरान ही इन्होंने सन 1979 में पंजाब विश्वविद्यालय से बी0 ए0 की परीक्षा पास की। नौकरी में व्यस्तता के कारण इन्होंने आगे की शिक्षा प्राप्त नहीं की। लेकिन अपने अंदर सीखने की इच्छा को इन्होंने जीवित रखा और जनवरी 2012 में अवकाश प्राप्त करने के बाद 2014 में नालंदा खुला विश्वविद्यालय में दाखिला लिया तथा 2016 में समाजशास्त्र में एम0 ए0 की परीक्षा पास की। पुनः 2017 में इन्होंने एम0 ए0 (शिक्षा) में प्रवेश लिया तथा 2019 की परीक्षा में सम्मिलित होकर 57.06% अंक के साथ सफलता प्राप्त किया। इस उम्र में भी शिक्षा के प्रति इनके ललक और लालसा से प्रेरित होकर इनकी पुत्री अमृता अम्बष्ठा, जो पूना में सीबीएसई से मान्यता प्राप्त विद्यालय में कंप्यूटर की शिक्षिका हैं ने अपने पिता के साथ ही 2017 में एम0 ए0 (शिक्षा) में प्रवेश लिया, तथा पिता के साथ ही इनका भी रिजल्ट 2019 प्रकाशित हुआ।
बताते चलें कि मास्टर वारंट अफसर एल0 जे0 एन0 वर्मा के दो पोते तथा एक नाती एवं एक नतिनी है। इनका एक पुत्र अमेरिका में CEO के पद पर तथा दूसरा मुंबई में इंजीनियर के पद पर कार्यरत है। इनके अनुज राकेश नारायण अम्बष्ठ शिक्षा के क्षेत्र में कार्य कर रही अखिल भारतीय संस्था “विद्या भारती” में गया विभाग के विभाग प्रमुख सह दक्षिण बिहार प्रांत के प्रचार प्रमुख पद पर कार्यरत है।

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