डॉ. अम्बेदकर श्रम सुधारों के सबसे बड़े शिल्पकार रहे : सीके सजी नारायण

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पटना,
16 फरवरी। डॉ. अम्बेदकर केवल संविधान के रचियता ही नहीं बल्कि श्रम सुधारों के शिल्पकार
भी थे।  उन्होने उस समय 14 घंटे के
श्रमिकों के कार्य को घटाकर 8 घंटे कराने तथा आज जो श्रमिकों को न्युनतम वेतन
प्राप्त हो रहा है,  उसको प्रभावी अस्तित्व में लाने का काम
भी किया था। उक्त बातें भारतीय मजदूर संघ राष्ट्रीय अध्यक्ष सीके सजी नारायण ने
भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) की 143वीं कार्यसमिति बैठक डीएनएस क्षेत्रीय प्रबंधन
संस्थान में कही।

बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष सीके सजी नारायण ने अपने उद्बोधन में श्रम क्षेत्र को राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था का अभिन्न क्षेत्र बताते हुए आर्थिक परिवर्तनों  के उतार-चढाव का हवाला दिया। उन्होने कहा कि जीएसटी व नोटबंदी ऐसी व्यवस्था जिसकी सर्वाधिक मार श्रमिकों पर पड़ी।  नीतिगत बदलाव पर प्रश्नचिन्ह लगाते हुए कहा कि सरकार श्रमिकों, किसानों, लघु उद्योगों, जनजातियों, उपभोक्ताओं तथा सामाजिक क्षेत्रों के जुड़े संगठनों से उचित संवाद न होने को कारण बताया।

सजी
नारायण ने यह स्पष्ट किया कि यद्यपि यह सरकार भी 44 श्रम कानुनों को मिलाकर 4 श्रम
संहिताओं में परिवर्तन  कर रही है। हालांकि
इसमें भी बहुतायत बातें अच्छी है पर जो मजदूरहितों के विपरीत है, बीएमएस ने उसमें बदलाव की पहल की है।
सजी  नारायण ने स्पष्ट किया कि भारतीय
मजदूर संघ केवल ट्रेड युनियन आंदोलन ही नहीं वरन् इसे सामाजिक आंदोलन के लिए
अग्रणी बनाना है।

बैठक
में बीएमएस के संस्थापक दत्तोपंत ठेंगड़ी की जन्मशताब्दी वर्ष 10 नवंबर 2019 से
नवंबर 2020 तक मनाने का निर्णय भी लिया लिया गया।

इस
अवसर पर प्रदेश महामंत्री उमा प्रसाद वाजपेयी द्वारा कार्यसमिति में शामिल सभी
सदस्यों को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया। बैठक में राष्ट्रीय संगठन मंत्री वी0
सुरेन्द्रन, राष्ट्रीय
मंत्री विनय कुमार सिन्हा, दुरई राज इन्दु झा, सुधा कुमारी आदि शामिल है।

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