पूरा पढ़े- टीपू सुल्तान ने हिंदुओं के साथ क्या किया?

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@अभिषेक राजा
भारत पर 600 वर्ष क्रूरतापूर्वक राज करने वाले मुग़लो के वंसजो को “कांग्रेस” ने देशभक्त स्वतंत्रता सेनानी बना दिया, टीपू जयंती मनाने लगे..पर क्या आपको पता है टीपू सुल्तान की असली जन्म तिथि में विरोधाभास है, जन्मतिथि 10 नही बल्कि 20 नवंबर है बतायी गयी है,तो कांग्रेस ने 10 नवंबर को टीपू जयंती का दिन क्यों चुना? क्या ये कारण तो नही की टीपू सुल्तान ने 10 नवंबर को मेलकोट (कर्नाटक) में 700 तमिल इयंगर ब्राह्मणों का निर्मम कत्ल किया था. वेसे अंग्रेज़ो भारत को गुलाम बनाने के मकसद से आये थे तो मुग़ल भी यहाँ ख्वाजा की कव्वाली गाने नही आये थे.
खुद के शाशन को सिकुड़ता देख मुगलों को अंग्रेज़ो से लड़ना ही था, लड़े भी, पर इस लड़ाई बखान करना और कहना कि आखिर के मुग़लों ने भारत के स्वाभिमान के लिए जंग लड़ी, वामपंथी इतिहासकारों की सोची समझी राजनीति थी जिसे कांग्रेस ने आगे बढ़ाया. माना कि टीपू लड़ा, पर किसके लिए…खुद की कौम, खुद की सल्तनत बचाने, न कि इस मुल्क के लिए.
आइये टीपू सुल्तान के बारे में कुछ तथ्यों पर आयना डालते है जिसे कोई टीपूभक्त मुग़लप्रेमी हिन्दु विरोधी कांग्रेसी आपको नही बताएगा.
इस्लामी करण के लिए किया नामों में बदला

प्रसिद्ध मुस्लिम इतिहासकार किरमानी और गुलाम मोहम्मद ने अपने लेखन में खुलासा किया था कि टीपू सुल्तान अपने आसपास की चीजों का इस्लामीकरण चाहता था इसलिए कई स्थानों के नाम इस्लामिक नाम में परिवर्तित कर दिए गए थे जैसे मंगलोर या मंगलापूरी का नाम जलालाबाद, मैसूर से नज़ाराबाद, बेपुर से सुल्तानपटनम, गूटी से फैज़-हिसार, रत्नागिरी से मुस्तफाबाद, कोज़हीकोडे से इस्लामाबाद, खेर टीपू की मृत्यु के बाद ही इन सभी स्थानों के नाम एक बार फिर पुराने रूप में परिवर्तित किए जा सके थे.
हिंदुओं का सिर काटकर क्रुरता की हदों को पार किया

कर्नल फुल्लार्टों की एक आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, मंगलोर में उस वक़्त के ब्रिटिश सेनाबल के प्रभारी पद में तैनात टीपू सुल्तान ने 1783 ईवी में अपने पालघाट फोर्ट के अधिग्रहण के दौरान ब्राह्मणों पर अत्याचार किए और बर्बरता की सारी हदें पार कर दी। टीपू सुल्तान ने अपनी क्रूर गतिविधियों से ब्राह्मणों को भयभीत कर रखा था। उसके सैनिक हिन्दुओं को मार कर उनके सिरों को ज़मोरिन किले पर लटका दिया करते थे. ज्यादती बढ़ने के साथ ही आखिर में ज़मोरिन ने इस किले का परित्याग करने का निर्णय लिया, ताकि उन्हें और हिंदुओं को टीपू सुल्तान के इन बर्बर अत्याचारों का और साक्षी न बनना पड़े.
हिन्दुओं को श्रीरंगापट्नम किले में कैद कर उनका जबरन धर्म-परिवर्तन कराया

टीपू सुल्तान के सैन्य अभियानों को “मालाबार मैनुअल” और “वॉयेज टू ईस्ट इंडीज” सहित कई ऐतिहासिक संदर्भों में क्रूर और अमानवीय बताया गया है। उसने कई हिन्दुओं उनकी मर्ज़ी के खिलाफ धर्मान्तरण कर दिया.
माना जाता है कि कूर्ग में एक हजार से ज्यादा हिन्दुओं को श्रीरंगापट्नम किले में कैद कर उनका जबरन धर्म-परिवर्तन कर दिया गया। बाद में ब्रिटिश और टीपू सुल्तान के बीच अंतिम लड़ाई के दौरान इस किले से हिंदू कैदी भाग निकलने में सक्षम रहे। बाद में उन्होंने एक बार फिर हिन्दू धर्म अपनाया.

इतिहासकार लुईस बी ने माना क्रूर था टीपू सुल्तान

लुईस बी जैसे इतिहासकारों ने हिंदुस्तान में टीपू सुल्तान द्वारा हिन्दुओं पर किए गए अत्याचारों को नादिर शाह, अलाउद्दीन खिल्जी की क्रूरता से भी अधिक निर्दयी बताया है.
हिंदू पुरुषों और महिलाओं को सरेआम फांसी दी जाने लगी

19वीं सदी में ब्रिटिश गवर्मेंट के अधिकारी और लेखक विलियम लोगान ने अपनी किताब ‘मालाबार मैनुअल’ में लिखा है कि कैसे टीपू सुल्तान ने अपने 30,000 सैनिकों के दल के साथ कालीकट में तबाही मचाई थी. टीपू सुल्तान हाथी पर सवार था और उसके पीछे उसकी विशाल सेना चल रही थी. पुरुषों और महिलाओं को सरेआम फांसी दी गई. उनके बच्चों को उन्हीं के गले में बांध पर लटकाया गया.
दक्षिण भारत के कई मंदिरों को किया ध्वस्त, इसाई का भी कराया धर्मांतरण

विलियम लोगन ने ही अपनी “मालाबार मैनुअल” में टीपू सुल्तान द्वारा ध्वस्त किए गए कुछ प्रसिद्ध मंदिर, थलिप्पारमपु मंदिर, थ्रिचैम्बरम् मंदिर, तेल्लीचेर्री का थिरुवंगतु मंदिर का वर्णन किया है.
इसी किताब में विलियम यह भी लिखते हैं कि शहर के मंदिर और चर्चों को तोड़ने के आदेश दिए गए. यहीं नहीं, हिंदू और इसाई महिलाओं की शादी जबरन मुस्लिम युवकों से कराई गई. पुरुषों से मुस्लिम धर्म अपनाने को कहा गया और जिसने भी इससे इंकार किया उसे मार डालने का आदेश दिया गया.

टीपू के पत्र और कई पुस्तकें में कुरुरता के साक्ष्य उपलब्ध है

कई जगहों पर उस पत्र का भी जिक्र मिलता है, जिसे टीपू सुल्तान ने सईद अब्दुल दुलाई और अपने एक अधिकारी जमान खान के नाम लिखा है. पत्र के अनुसार टीपू सुल्तान लिखता है, ‘पैगंबर मोहम्मद और अल्लाह के करम से कालीकट के सभी हिंदूओं को मुसलमान बना दिया है. केवल कोचिन स्टेट के सीमवर्ती इलाकों के कुछ लोगों का धर्म परिवर्तन अभी नहीं कराया जा सका है. मैं जल्द ही इसमें भी कामयाबी हासिल कर लूंगा.’
यहां 1964 में प्रकाशित किताब ‘लाइफ ऑफ टीपू सुल्तान’ का जिक्र भी जरूरी है. इसमें लिखा गया है कि उसने तब मालाबार क्षेत्र में एक लाख से ज्यादा हिंदुओं और 70,000 से ज्यादा ईसाइयों को मुस्लिम धर्म अपनाने के लिए मजबूर किया. इस किताब के अनुसार धर्म परिवर्तन टीपू सुल्तान का असल मकसद था, इसलिए उसने इसे बढ़ावा दिया. जिन लोगों ने इस्लाम स्वीकार किया, उन्हें मजबूरी में अपने बच्चों की शिक्षा भी इस्लाम के अनुसार देनी पड़ी. इनमें से कई लोगों को बाद में टीपू सुल्तान की सेना में शामिल किया गया और अच्छे ओहदे दिए गए.
टीपू सुल्तान के ऐसे पत्रों का भी जिक्र मिलता है, जिसमें उसने फ्रेंच शासकों के साथ मिलकर अंग्रेजों को भगाने और फिर उनके साथ भारत के बंटवारे की बात की. ऐसा भी जिक्र मिलता है कि उसने तब अफगान शासक जमान शाह को भारत पर चढ़ाई करने का निमंत्रण दिया, ताकि यहां इस्लाम को और बढ़ावा मिल सके.

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