बातचीत – डॉ. सियाराम शर्मा ( भारतीय मजदुर संघ, बिहार प्रदेश अध्यक्ष ), मुद्दा- भारतीय मजदुर संघ और बिहार

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बातचीत – डॉ. सियाराम शर्मा (भारतीय मजदुर संघ, बिहार प्रदेश अध्यक्ष), मुद्दा- भारतीय मजदुर संघ और बिहार

1. भारतीय मजदूर संघ क्या है?

उत्तर:- भारतीय मजदूर संघ श्रमिक क्षेत्र में देशभक्त संगठन है। इसके विचार में राष्ट्रधर्म सर्वोपरि है। यह संगठन संगठित एवं असंगठित दोनों क्षेत्रों के मजदूरों के लिए काम करती है। भारत के अन्य श्रम संगठनों की तरह यह किसी संगठन के विभाजन के कारण नहीं बना वरन एक विचारधारा के लोगों का सम्मिलित प्रयास का परिणाम है। यह देश का पहला मजदूर संगठन है, जो किसी राजनैतिक दल की श्रमिक इकाई नहीं, बल्कि मजदूरों का, मजदूरों के लिए, मजदूरों द्वारा संचालित अपने में स्वतंत्र मजदूर संगठन है।
2. दूसरे मजदूर संगठनों से भारतीय मजदूर संघ कैसे अलग है ?

उत्तर:- दूसरे मजदूर संगठन अप्रत्यक्ष रूप से राज भोग रहे हैं। दूसरे संगठनों में प्रजातांत्रिक व्यवस्था नहीं है। वहाँ पैरवी से लोग अध्य्क्ष बनते हैं। हमारे यहाँ इस तरह की गलत व्यवस्था नहीं है। हमारे संगठन में प्रजातांत्रिक व्यवस्था है। दूसरे संगठन अपनी बात मनवाने के लिए हड़ताल को अपना पहला शास्त्र मानते है। जबकि हम हड़ताल को सबसे अंतिम शास्त्र मानते हैं। भारतीय मजदूर संघ सबसे पहले राष्ट्र के बारे में सोचते है उसके बाद उद्योग और उसके बाद मजदूर। अगर देश नहीं रहेगा तो उद्योग का कोई मतलब नहीं रह जायेगा। अगर उद्योग नहीं बचा तो मजदूर के लिए कुछ नहीं रह जाएगा।
3. बिहार में भारतीय मजदूर संघ की क्या स्थिति है ?


उत्तर:- हमारी नीति के विरुद्ध कभी भी ट्रेड यूनियन नहीं जाती है। बिहार में हमारा संगठन सशक्त है। ट्रेड यूनियन में भारतीय मजदूर संघ सबसे आगे है। दूसरे संगठनों ने जहाँ ट्रेड यूनियनों के बड़े पदों पर जा कर उद्योगों को तहस – नहस किया। वहीं दूसरी और भारतीय मजदूर संघ उद्योगों को बढ़ावा मिलने वाला काम किया। बिहार में भी यह काम हो रहा है।
4. बिहार में भारतीय मजदूर संगठन की भविष्य में क्या योजनाएं हैं ?

उत्तर:- आशा, आंगनबाड़ी, रसोईया, खेतिहर मजदूर, इत्यादि ऐसे जितने भी असंगठित मजदूरों की श्रेणी में आते हैं उन सभी कर्मचारियों को ई.एस.आई और पी.एफ़ से जोड़ना हमारा पहला लक्ष्य है।
सभी 38 जिलों में ई.एस.आई के अस्पताल हो। इससे फायदा यह होगा स्वास्थ के क्षेत्र में सरकारी और गैर सरकारी से लोगों की निर्भरता कम होगी। सभी जिलों में ई.एस.आई अस्पताल होने से तकरीबन एक लाख लोगों को रोजगार उपलब्ध होगा।
आज देश में 27000 करोड़ रुपये पीएफ के ऐसे ही बैंकों में पड़े हुए हैं। जिसका कोई दावेदार नहीं है। मान लीजिए बिहार का कोई मजदूर मुम्बई काम करने गया वहाँ पर उसका पीएफ तो कटा। लेकिन कुछ सालों बाद वह मुंबई छोड़ कर दूसरे शहर चला गया काम करने तो उसका वहाँ भी पीएफ बना। लेकिन वह दोनों जगहों से अपना पीएफ का पैसा नहीं लिया। उस मजदूर ने सोचा छोटी सी राशि है तो क्यों इतना खर्चा कर के वह पीएफ के पैसे लेने जाए। उसके लिए तो सिर्फ 6-7 हज़ार रुपये है, लेकिन यही कुछ रुपये मिलकर 27000 करोड़ रुपये हो गए है।
ऐसी स्थिति से निकलने के लिए सरकार लेबर कार्ड बनवाने जा रही है। उस कार्ड में जो नंबर दर्ज होगा वह सीधे खाते से जुड़ा होगा। चाहे वह व्यक्ति दिल्ली में काम करे या कुछ दिनों बाद मुम्बई में काम करे। पीएफ का पैसा सीधे खाते में जुड़ जाएंगे। इस चीज़ के लिए हम सभी असंगठित मजदूरों को जागरूक कर रहे हैं।
अभिलाष दत्ता

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