भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद

0
SHARE

पटना,1 सितंबर। 20वी सदी के प्रसिद्ध गौड़ीय वैष्णव धर्मप्रचारक “स्वामी श्रील भक्तिवेदांत प्रभुपाद ” का जन्म 1 सितंबर1896 ईस्वी को कोलकाता में हुआ। इनका पुरवाश्रम नाम अभयचरण डे था। 1922 ईस्वी में इन्होंने श्रीमद्भगवादगीता पर टिप्पणी लिखी।
1946 ईस्वी में गौड़ीय समाज ने इन्हें भक्ति वेदान्त की उपाधि से सम्मानित किया, क्योंकी इन्होंने लुप्त हो चुकी सहज भक्ति द्वारा वेदान्त को सरलता से हृदयंगम करने की परंपरागत मार्ग पुनः स्थापित किया।
1956 ईस्वी में सन्यास ग्रहण करने के पश्चात इन्होंने वृन्दावन में श्रीमदभागवतपुराण का अंग्रेजी में अनुवाद किया। 1965 ईस्वी में 70 वर्ष की आयु में ये अमेरिका गये तथा 1966 ईस्वी मेंअन्तर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ(iskon) की स्थापना की। 1978 ईस्वी में वर्जिनिया (अमेरिका) की पहाड़ियों पर नववृन्दावन की स्थापना की।
1972 ईस्वी में इन्होने टेक्सास के डैलास में गुरुकुल की स्थापना कर प्रारंभिक और माध्यमिक शिक्षा का सूत्रपात किया। विश्व की सबसे बड़ी आध्यात्मिक पुस्तकों की प्रकाशन करने वाली संस्था भक्तिवेदांत बुक ट्रस्ट की स्थापना की।कृष्ण भावना के वैज्ञानिक आधार को स्थापित करने के लिए भक्तिवेदांत इस्टीट्यूट की स्थापना की एवम सम्पूर्ण विश्व का 14 बार भ्रमण किया।
अंततः यह दिव्य व्यक्तित्व 14 नवंबर 1977 ईस्वी को 81 वर्ष की अवस्था में ब्रह्मविलिन हो गया।
लेखक-श्यामजी तिवारी

LEAVE A REPLY