जनजातीय गौरव दिवस के दिन वनवासी परिवार पर हमला

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– संजीव कुमार

कटिहार। पूरे विश्व में भारत का जनजातीय समाज जब 15 नवंबर को गौरव दिवस मना रहा था, उसी दिन कटिहार के बरारी प्रखंड में वनवासी परिवारों के ऊपर हमले हो रहे थे। 55 वर्षीय मंसूर मुर्मू के घर के पर सैकड़ों लोग उनके परिवार के महिलाओं पर हमले कर रहे थे। इस हमले में मंसूर मुर्मू की 25 वर्षीया बेटी मुन्नी देवी गंभीर रूप से घायल हुई। उसके ऊपर दबिया (एक धारदार हथियार) से हमला किया गया।
कटिहार में कोलासी के निकट 15 नवंबर को सुबह 10 बजे वनवासी कल्याण आश्रम द्वारा पड़ती टोला में जनजातीय गौरव दिवस मनाया जा रहा था। वहीं वनवासी कल्याण आश्रम के कार्यकत्र्ता मिथिलेश सिंह को सूचना मिली कि समीप के ही सिकट पंचायत के सिरकटा ग्राम में बंगाली मुसलमानों की भीड़ ने हमला कर दिया। इस गांव में 15 जनजातीय परिवार वर्षों से रह रहा है। गांव के ही जमीन पर 70 वर्षों से अधिक समय से ये लोग खेती कर रहे हैं। जमीन जिहादियों द्वारा बार-बार इन्हें जगह खाली करने की धमकी दी जाती है। ये लोग न्यायालय के निर्णय को सर्वोपरि मानते हैं। बार-बार जनजातीय समुदाय न्यायालय के आदेश को सर्वोपरि मानने की बात कहता है। ये न्यायालय के निर्णय की प्रतीक्षा करने की बात कह रहे थे। बस इसी बात का गुस्सा बंगाली मुसलमानों को नागवार गुजरा। सुबह 10 बजे की घटना उसी का प्रकटीकरण है। मंसूर मुर्मू को भी पीटा गया। उनकी बड़ी बेटी मरांग मुर्मू और भगिनी शांति टुडू भी इस हमले में घायल हुई। काफी प्रयास के बाद पुलिस वहां पहुंची।
यह इलाका केला की खेती के लिए विशेष तौर पर जाना जाता है। इनके द्वारा लगाये गये केला के बगीचे को भी लोगों ने तहस-नहस कर दिया। आस-पास में मुसलमानों की बड़ी आबादी है। इस गांव के समीप ही 100 परिवार से अधिक मुसलमान हैं। समीपवत्र्ती क्षेत्रों की बात करें तो 200 से अधिक मुस्लिम परिवार यहां रहते हैं। जनजातीय समुदाय को बेवजह परेशान करना, उनकी महिलाओं के ऊपर फब्तियां कसना इन दिनों बढ़ गया है। प्रखंड की सक्रिय सामाजिक कार्यकत्र्ता शांति जायसवाल इस पूरे घटनाक्रम को पंचायत चुनाव से जोड़कर देखती हैं। बरारी में 22 पंचायत हैं। आजादी के बाद पहली बार इसमें 18 पंचायत के मुखिया एक विशेष समुदाय के रहे हैं। इनके निर्वाचन के बाद बंगाली मुसलमानों का आतंक कुछ ज्यादा बढ़ गया है।

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