‘नार्कोटिक जिहाद’ का षड्यंत्र! – युवा पीढ़ी को कमजोर कर भारत को नष्ट करने का षड्यंत्र?

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प्रशांत संबरगी

पटना (विसंके)। भारत में दो प्रकार के जिहाद हैं। एक ‘हार्ड जिहाद’ जिसमें बम विस्फोट, आतंकवादी गतिविधियां आती हैं। दूसरा ‘सॉफ्ट जिहाद’ है, जिसमें ‘हलाल अर्थव्यवस्था’, ‘लैंड जिहाद’, ‘लव जिहाद’, ‘नार्कोटिक जिहाद’ (मादक पदार्थों का जिहाद) जैसे जिहाद आते हैं। बिना रक्त बहाए और बंदूक की गोली व्यर्थ किए बिना भारत को कमजोर करने के लिए ‘सॉफ्ट जिहाद’ का उपयोग किया जाता है।

भारत की युवा पीढ़ी को कमजोर कर भारत को नष्ट करने का षड्यंत्र ‘नार्कोटिक्स जिहाद’ है। पाक के मादक पदार्थ विक्रेता रमजान को पकड़ने पर उसने यह सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है। अगर युवा पीढ़ी नशे के गिरफ्त में आ जाती है तो भारत को परास्त करना आसान हो जायेगा। नशेड़ी अपनी लत के लिए किसी भी सीमा तक गिर सकता है। युवा पीढ़ी देश का भविष्य होता है। युवा को पथभ्रष्ट कर देश को बगैर हथियार के बर्बाद किया जा सकता है।

वैसे तो यह षड्यंत्र पूरे देश में चल रहा है। लेकिन पंजाब के मेहनतकश युवाओ को इसने काफी हद तक बर्बाद कर दिया है। इस विषय पर केंद्रित चर्चित फिल्म ‘उड़ता पंजाब’ है।

Narcotic Jihad keral

पंजाब के उपरांत केरल ‘नार्कोटिक जिहाद’ का गढ़ बनता जा रहा है। केरल में मादक पदार्थों से संबंधित अपराधों की संख्या पहले 500 थी, वर्ष 2016 के उपरांत संख्या 3,500 हो गई है। इसीलिए केरल के फादर जोसेफ कल्लारनगट्ट ने सार्वजनिक रूप से कहा कि ईसाई युवतियों को मादक पदार्थों के माध्यम से निशाना बनाया जा रहा है। केवल हिन्दी ही नहीं, अपितु कन्नड, तमिल, तेलगु इत्यादि चलचित्र सृष्टि की पार्टियां मादक पदार्थों के बिना नहीं होतीं, यह राष्ट्रीय सच है।

कांग्रेस दल के बेंगळुरू के एक अल्पसंख्यक समुदाय के विधायक की जन्मदिन पार्टी में बॉलीवुड के सभी कलाकार आए थे। इसका आयोजन अभिनेता सुशांत राजपूत अभियोग में संदिग्ध ‘इम्तियाज खत्री’ ने किया था। संक्षेप में सैंडलवुड (कन्नड फिल्म जगत) का मादक पदार्थों से संबंध स्पष्ट हो रहा है। वर्ष 2019 में ‘मादक पदार्थ, मुक्त भारत’ इस अभियान के लिए ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ की ओर से फिल्म जगत के लोगों का आवाहन करनेवाली छोटी सी भेंट लेने का विचार किया, तब 70 प्रतिशत लोगों ने ऐसा करने से मना किया; क्योंकि अधिकांश चलचित्र सृष्टि इसमें सहभागी है। अत: आर्यन खान को समर्थन मिल रहा है।

मादक पदार्थों का व्यवसाय आतंकवाद और आपराधिक गतिविधियों हेतु पैसे कमाने का बडा माध्यम है; परंतु इसकी जांच और शीघ्र न्याय होकर जब तक दंड नहीं दिया जाएगा, तब तक इसे रोकना कठिन है। मादक पदार्थ के अपराधों को पुलिस, सीमा शुल्क विभाग, मादक पदार्थविरोधी दल सभी पैसे कमाने  का माध्यम समझते हैं। इसीलिए अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के 15 सहयोगियों की आत्महत्या अथवा हत्या की जांच न कर, उसकी मादक पदार्थों के अंतर्गत जांच की गई। सनबर्न फिल्म फेस्टिवल में गोवा की नेहा बहुगुणा नाम की युवती और अन्य तीन युवकों की मादक पदार्थों के अतिसेवन से मृत्यु हुई थी।

भारत की युवा पीढ़ी को भ्रष्ट किया जा रहा है। भारतीय युवाओं को मादक पदार्थों से बचाने के लिए अभियान चलाने की आवश्यकता है। समय रहते अगर नहीं चेता गया तो हालत बद से बदतर होते जायेंगे। भारत एक अपाहिज देश बन जाएगा।

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