सज्जन लोग सामर्थ्य का उपयोग दुर्बलों की रक्षा करने के लिए करते हैं – डॉ. मोहन भागवत जी

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जम्मू (विसंके)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने अपने जम्मू प्रवास के चौथे दिन रविवार को अंबफला स्थित केशव भवन में वर्चुअल माध्यम से जम्मू कश्मीर प्रांत के 989 स्थानों से आनलाइन जुड़े स्वयंसेवकों को संबोधित किया। अपने संबोधन में सरसंघचालक जी ने संघ की स्थापना से लेकर शाखाओं के विस्तार, व्यक्ति निर्माण, संगठन, राष्ट्र और संगठन के नाते आने वाले समय में एवं वर्तमान चुनौतियों आदि विषयों पर स्वयंसेवकों का मार्गदर्शन किया।

डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि 2025 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूरे होंगे। आज संघ 96 वर्ष का हो गया है यानि कि हमारा काम 96 वर्ष पुराना है। आयु में पुराना होने पर भी संघ स्वास्थ्य में, प्रवृत्ति में और शक्ति के रुप में पुराना नहीं है। संघ को हमने ऐसा ही बनाए रखना है। यह सब संघ के स्वयंसेवकों के निस्वार्थ भाव से काम करने की भावना से ही संभव हो पाया है। उन्होंने कहा कि जो काम संघ ने विगत 90 वर्ष में किया है, विगत नौ दशकों जितना काम हमने किया, आगे आने वाले 30 वर्ष में हमें उतना ही कार्य करने संकल्प हमें करना है।

dr. mohan jee bhagwat

उन्होंने स्वयंसेवकों से कहा कि जब कोई काम हम 96 साल से कर रहे हैं तो हो सकता है कि हमारा ध्यान हट जाए, क्यांकि जब काम करने वाले शरीर को आदत लग जाती है तो सोचने की आवश्यकता नहीं रहती। जब सोचना बंद होता है तो व्यक्ति आदत से काम करता रहता है तो गलती होना संभव है। इसलिए हम सभी को सावधान रहना चाहिए। क्योंकि सावधानी हटी तो दुर्घटना घटी।

सरसंघचालक जी ने संगठन में शक्ति का उदाहरण देते हुए कहा कि शक्ति थोड़ी भी हो उसकी पहचान होती है। ऐसा अनुभव संघ के प्रारंभिक दौर में पूजनीय डॉक्टर हेडगेवार जी के समय में नागपुर में हुआ था। अच्छी शक्ति को लोग पहचानते हैं और इससे डरते भी हैं। प्रारंभ में संघ का अच्छा काम बढ़ने से भी स्वार्थी लोगों को डर लगता था, उस डर के मारे बडा विरोध हुआ, वर्ष 2000 तक विरोध चलता रहा। आज भी चल रहा है, परंतु 2000 तक विरोध का लोगों पर परिणाम होता था, लेकिन आज परिणाम नहीं होता। इस अनुकूलता के रहते हुए भी  हमें गफलत में नहीं आते हुए सतर्क रहना है क्योंकि सावधानी हटने की संभावना अधिक है। यशस्वी होते-होते अगर सावधानी हट गई तो पूरा यश अपयश में बदल जाता है। पूर्ण यश मिलने तक सावधानी नहीं हटनी चाहिए और इसकी आवश्यकता लंबे समय तक है और तब तक सावधान रहने का धैर्य और बुद्धि चाहिए, ऐसी दृष्टि स्वयंसेवकों को ध्यान में रखनी है।

सरसंघचालक जी ने कहा कि इसको ध्यान में रखना होगा कि हम संपूर्ण हिंदू समाज का संगठन करने चले हैं, भारत को विश्व गुरु बना सकने वाला हिंदू समाज। भारत विश्व के हर क्षेत्र में सबसे आगे हो और हम संपूर्ण विश्व का कल्याण करने वाला जीवन जीने वालों में भी सबसे आगे रहे, ऐसा भारत वर्ष हमे खड़ा करना है। अभी काम शुरु हुआ है, खत्म नहीं हुआ। इसलिए धैर्यपूर्वक सावधानी से काम करने की आवश्यकता अधिक है।

उन्होंने कहा कि इस सबके लिए हमें शाखा में नित्य नियमित जाकर वहां के संस्कारों को सीखते रहना चाहिए और जो संस्कार सीखे उसकी आदत करनी चाहिए। शाखा का कार्यक्रम उत्तम किया तो संस्कार रहता है, संस्कार रहता है तो आदत रहती है। इसलिए शाखा में उत्कृष्ट कार्य करना आवश्यक है। शाखा में नित्य जाने के अलावा और तीन काम भी स्वयंसेवक हैं। प्रतिदिन शाखा में जाना, शाखा में जो कार्यक्रम है उसे मन लगाकर करते हुए अपना गुणवर्धन करना और संघ के दायित्व को प्रमाणिकता के साथ निभाना। उन्होंने कहा कि स्वयंसेवक शाखा में समर्थ होने के लिए आते हैं। सामर्थ्य का उपयोग अच्छे लोग दुर्वलों की रक्षा करने के लिए करते हैं। अगर हिंदू समाज में दुर्वलता है तो उसकी रक्षा का कर्तव्य हमारा है। अच्छे सामर्थ्यवान लोग बल का प्रयोग दूसरे को समर्थ करने के लिए करते हैं, बुरे लोग दूसरों को परेशान करने के लिए। इसके लिए स्वयंसेवकों को तैयार होना है और यह संघ की शाखा के माध्यम से ही होता है।

इस संबंध में सरसंघचालक जी ने रामायण के एक प्रसंग का उदाहरण देते हुए कहा कि रावण के साथ बल था, लेकिन शील नहीं था। शील भगवान राम के पास था। इसलिए बलशील होना भी आवश्यक है। जीवन में कभी हारना नहीं, थकना नहीं, बार-बार प्रयास करते रहना। सब सहन करके, सब विपत्तियों से रास्ता निकाल कर और वगैर रुके और डरे, इसको कहते है वीरवृत। क्योंकि यह देश हमारा है, संपूर्ण हिंदू समाज को हम संगठित करेंगे, भारत को विश्वगुरु बनाएंगे और जब तक यह लक्षय पूरा नहीं होगा तब तक हमारे जीवन में पहला काम यहीं है। इसके लिए समय और समर्पण दुगना देना पड़ेगा।

डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि संघ का काम अभी बहुत बडा है, संघ के कार्य के लिए अभी बहुत अनुकूलता है। संघ का कार्य निश्चित रुप से बढ़ेगा, लेकिन अभी पूरा नहीं हुआ है, उसको पूरा करना है। इसलिए शीघ्रातिशीघ्र एक प्रचंडव्यापी हिंदू समाज की संगठित शक्ति जो हर काम को कर सके, देश को परम भैवभ संपन्न बनाए, उसको खड़ा करना है। उस काम को करने के लिए अभी रिलेक्स होने का समय नहीं है, सावधान रहना है, प्रयत्न को बढ़ाना है, सोच समझ कर, दक्षतापूर्वक, दृष्टि ठीक रखकर अपने ध्येय पथ पर आगे बढ़ना है और कार्य को शीघ्रातिशीघ्र पूरा करना है। इस अवसर पर उत्तर क्षेत्र के संघचालक प्रो सीता राम व्यास जी और जम्मू कश्मीर प्रांत के सह संघचालक डॉ गौतम मैंगी जी भी उपस्थित थे।

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