मकर संक्रांति के बाद श्रीराममंदिर निर्माण का कार्य होगा प्रारंभ : आलोक कुमार

0
SHARE
विश्व हिन्दू परिषद् के केन्द्रीय कार्याध्यक्ष श्री आलोक कुमार का पटना के पत्रकार वार्ता में दिया गया वक्तव्य

पटना (विसंके)। विश्व हिन्दू परिषद् ने निर्णय लिया है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के सहयोग से हिन्दू समाज से सहयोग लिया जायेगा। प्रारंभ में विहिप ने लगभग 4 लाख गांव और 11 करोड़ परिवार के सहयोग से अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर एवं अन्य सुविधाओं के निर्माण का लक्ष्य रखा था।
हालांकि देश के राज्यों और जिलों के प्रतिनिधियों की प्रथम बैठक में यह प्रतीत होता है कि अब हम 5.25 लाख गांव और 13 करोड़ परिवार तक पहुंचने में सफल हो पायेंगे।
इस प्रकार यह विश्व इतिहास में अबतक का सबसे बड़ा अभियान होगा। एक नव जागरण का अभियान जिसमें सबसे ज्यादा गांवों, परिवारों और लोगों तक पहुंचा जायेगा। राम मंदिर के निर्माण से राम राज्य का अभियान चलेगा।
बिहार में विहिप ने मंदिर निर्माण के लिए 35 हजार गांव और 1.5 करोड़ परिवारों एवं 7.5 करोड़ हिन्दू श्रद्धालुओं के सहयोग का लक्ष्य रखा। राम मंदिर का शिलान्यास बिहार के ही कामेश्वर चैपाल ने किया था जो कि अनुसूचित जाति के एक प्रमुख हिन्दू नेता हैं। श्री चैपाल अभी रामजन्मभूमि तीर्थक्षेत्र के सम्माननीय न्यासी हैं।
इस उद्देश्य के लिए श्रीरामजन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ने बिहार में प्रख्यात चिकित्सक पद्मश्री डाॅ. आर. एन. सिंह के अध्यक्षता में श्रीराममंदिर निर्माण निधि समर्पण समिति का गठन किया है। यह पूरा अभियान पूज्य जीयर स्वामी एवं अन्य संतों के निर्देश में गठित मार्गदशर्क समिति द्वारा किया जायेगा। मंदिर निर्माण के लिए 10 रूपये, 100 रूपये और 1000 रूपये के कूपन छपाये गये हैं। 2000 रूपये से अधिक दान रसीद के माध्यम से प्राप्त किया जायेगा। 2000 रूपये से अधिक मंदिर निर्माण में सहयोग देने वालों को आयकर अधिनियम की धारा 80जी का लाभ मिलेगा।
प्रत्येक संग्रह टोली में पांच स्वयंसेवक होंगे। वे जमाकर्ता को रोज इसकी रिपोर्ट देंगे। 48 घंटे के अंदर सभी जमा राशि तीर्थक्षेत्र के बैंक खाते में जमा कर दी जायेगी। प्रत्येक जमाकर्ता के पास भारतीय स्टेट बैंक, बैंक आॅफ बरौदा और पंजाब नेशनल बैंक के तीन बैंकों में से एक के निकटतम शाखा का पंजीकृत कोड होगा। धन संग्रह में पूरी पारदर्शिता बरती जायेगी।

डॉ. आरएन सिंह ने दान किए ग्यारह लाख रुपए
डॉ. आरएन सिंह ने दान किए ग्यारह लाख रुपए

मंदिर निर्माण का कार्य लार्सन एंड टूब्रो कंपनी द्वारा किया जा रहा है। मंदिर निर्माण के अभियंता टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेस के होंगे। आईआईटी मुंबई, आईआईटी दिल्ली, आईआईटी चेन्नई, आईआईटी गुवाहाटी, सीबीआरआई रूड़की, लाॅर्सन एंड टूब्रो के अभियंता फाउंडेशन ड्राइंग पर काम कर रहे हैं। पूरा मंदिर पत्थर के खंडों का होगा।
मंदिर का कुल क्षेत्रफल 2.7 एकड़ होगा। इसका निर्माण क्षेत्र 47 हजार 400 वर्गफुट है। मंदिर की लंबाई 335 फीट के साथ 360 फीट होगी। मंदिर की संरचना तीन मंजिली होगी। इसमें पांच मंडप भी होंगे। भूतल पर काॅलम की संख्या 160, प्रथम तल पर 132 और द्वितीय तल पर 74 होगी।
उम्मीद है कि 2024 तक श्रीराम लला मुख्य मंदिर के गर्भगृह में स्थापित हो जायेंगे और भक्तों को भव्य मंदिर में दर्शन के लिए आमंत्रित किया जायेगा।
मंदिर के साथ अंतर्राष्ट्रीय स्तर का पुस्तकाल, अभिलेखागार, संग्रहालय, शोध केन्द्र, यज्ञशाला, वेदपाठ शाला, सत्संग भवन, प्रसाद वितरण केन्द्र, रंगभूमि, धर्मशाला, प्रदर्शनी एवं कई अन्य सुविधाएं भी होंगी। विहिप का विश्वास है कि यह केवल एक और मंदिर का अभियान नहीं है बल्कि यह हिन्दू नवचेतना के जागरण का अभिायान है। इससे समाज की कई दुर्गुणें इस अभियान से ऊंच-नीच, गरीबी, स्वास्थ्य, शिक्षा और कौशल की कमियां दूर होंगे। इससे ही महिलाओं की गरिमा पुनः बहाल होंगी और आतंकवाद का दंश विश्व से समाप्त होगा। ‘सर्वे भवंतु सुखिनः’ का वैदिक लक्ष्य प्राप्त कर सभी सुखी, स्वस्थ और वेदभाव से मुक्त होगा। सभी सुखी होंगे और कोई दुःखी नहीं होगा। विश्व हिन्दू परिषद् मानता है कि यह हिन्दुओं का वैश्विक अभियान है और वह इसे प्राप्त करने के लिए आश्वस्त है।

LEAVE A REPLY