गया के ही लौंगी भुईंया बने दूसरे दशरथ मांझी

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—संजीव कुमार

इस बार गया के हीं लौंगी भुईंया ने इतिहास रच डाला है। 20 साल में 5 किलोमीटर लंबी, 4 फीट चैड़ी एवं 3 फीट गहरी पईन की खुदाई कर डाली है। इस अद्भुत कार्य को लौंगी भुईंया ने अपने गांव कोठीलवा की गरीबी दूर करने के लिए किया है। यह गांव बिहार के गया के इमामगंज व बांके बाजार प्रखंड की सीमा पर जंगल में बसा हुआ है।
गांव के युवाओं को प्रदेश जाकर कमाना मजबूरी थी। खेती योग्य जमीन होने के बावजूद पानी की अनुपलब्धता थी। जिस कारण लोग खेती नहीं करते थे। कृषि के अलावा दूसरा कोई स्रोत नहीं था। कृषि संभव नहीं था, इसलिए परिवार को छोड़कर प्रदेश जाना मजबूरी थी। यह बात लौंगी भुईंया को सहन नहीं होती थी। युवाओं के पलायन से दुःखी होकर लौंगी ने खेतों तक पानी पहुंचाने का निश्चय वर्ष 2001 में किया। अगस्त, 2001 से अकेले ही बंगेठा सगवाही जंगल से खुदाई शुरु कर दी। उन्होंने यहां देखा था कि जहां मवेशी पानी पीने जाते हैं वहां बहुत बड़ा जल का स्रोत है। उनके मन में यह विचार आया कि यहां से पईन की खुदाई करके खेत तक पानी ले जाया जा सकता है। गत 20 वर्षों से प्रतिदिन वे अकेले हाथ में कुदाल, खंती और टांगी लेकर निकल पड़ते थे। दशरथ मांझी की तरह पहले लोगों ने उनका मजाक उड़ाया, फिर पागल कहा, बाद में इनकी उपेक्षा करने लगे। लेकिन, लोगों की प्रतिक्रिया पर ध्यान दिये बगैर अपने धुन में रमे रहे। अंततः इस वर्ष उन्हें कामयाबी मिली।
लौंगी ने 20 साल में इस 5 किमी लंबे पईन की खुदाई कर गांव तक पानी पहुंचा ही दिया। अब इसका नाम लौंगी आहर रखा गया है।

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