गया के नक्सल प्रभावित क्षेत्र में युवा दंपत्ति चलाते हैं ‘गुरुकुल’

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– संजीव कुमार

बिहार के चुनिंदा नक्सली क्षेत्रों में शामिल है गया जिले का बाराचट्टी प्रखंड। यहां कभी चुनाव प्रचार करते समय वर्तमान उप राष्ट्रपति वैंकेया नायडू का हेलिकाॅप्टर को लैंड कराना पड़ा था। उस समय काफी हड़कंप मचा था। नक्सलियों की फितरत में सरकारी विद्यालयों को ध्वस्त कर देना भी शामिल है। ऐसे में नक्सली क्षेत्र के बच्चे शिक्षा की रौशनी से वंचित रह जाते हैं। ऐसे बच्चों के बीच शिक्षा की लौ जलाने का संकल्प युवा दंपत्ति अनिल कुमार और उनकी पत्नी रेखा ने लिया है।
बाराचट्टी प्रखंड मुख्यालय से लगभग 10 किलोमीटर दूर काहूदाग पंचायत के कोहबरी गांव में ये दंपत्ति गुरुकुल चलाकर बच्चों को शिक्षा एवं हुनर से संस्कारित कर रहे हैं। यहां उन्होंने सहोदय आश्रम स्थापित किया है। इस आश्रम में 25 बच्चों को आवासीय शिक्षा दी जाती है। बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए भारतीय परंपरा की शिक्षा दी जाती है। ऋषि-मुनि जिस प्रकार बच्चों को शिक्षित करते थे, कुछ उसी प्रकार ये दंपत्ति भी इन बच्चों को शिक्षित करते हैं।
सहोदय आश्रम के चारों ओर घना जंगल है। यहां दिन के उजाले में भी जाने से लोग सहम जाते हैं। ऐसे बीहड़ जंगल को इस दंपत्ति ने अपना कार्यस्थल बनाया है। पटना के बिहटा प्रखंड के पहाड़पुर गांव के रहने वाले अनिल कुमार ने अपनी उच्च शिक्षा दिल्ली से हासिल की है। अनिल और रेखा शादी के बाद दिल्ली गये और वहीं से अनिल ने एमफिल किया। इनकी सहधर्मिनी रेखा स्नातकोत्तर हैं। इनकी चाहत थी कि वे लोग गांव में आकर रहें। दिल्ली में रहने के क्रम में ही इन्हें भूदान कमिटी ने इस जगह के बारे में जानकारी दी। यहां आकर इन्हें प्रत्यक्ष महसूस हुआ कि इस सुदूर इलाके में शिक्षा की कितनी आवश्यकता है। 2017 में आकर एक झोपड़ी में इनलोगों ने अपना कार्य प्रारंभ किया। आज इस क्षेत्र में इस युवा दंपत्ति को काफी सम्मान मिलता है। अनुसूचित जाति के 25 बच्चों को इनलोगों ने एक प्रकार से गोद ले लिया है। ये इन बच्चों के अभिभावक से सिर्फ 1 किलो चावल दीक्षा में लेते हैं बाकी अपने दोस्तों के सहयोग से सारा खर्च जुटाते हैं। यहां के बच्चों को सिर्फ औपचारिक शिक्षा ही नहीं दी जाति बल्कि उनके सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान दिया जाता है। यहां के बच्चे न सिर्फ पढ़ाई करते हैं बल्कि खेती, पाक कला इत्यादि चीजों में भी निपुण बन रहे हैं। आश्रम की दिनचर्या ब्रह्म मुहूत्र्त से शुरु हो जाता है जो देर शाम तक चलती है।

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