नाव बनी जीवन की पतवार…

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बिहार कई आपदाओं को एक साथ झेल रहा है। जहां पूरा बिहार कोरोना संक्रमण से पीड़ित है वहीं उत्तर बिहार में बाढ़ का प्रकोप है। 20 लाख से अधिक आबादी बाढ़ के दंश को झेल रही है। राज्य की कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। ऐसे में नाव ही लोगों के लिए जीवन रेखा साबित हो रही है। नाव पर ही विवाह जैसे मांगलिक कार्य सम्पन्न किये जा रहे हैं। वर्तमान परिस्थिति को देखते हुए बिहार के स्वास्थ्य विभाग ने पानी की तरंगों पर भी स्वास्थ्य सेवाओं को उपलब्ध कराने की तैयारी की है। राज्य के बाढ़ प्रभवित क्षेत्रों में बोट एम्बुलेंस और कोरोना एम्बुलेंस की तैनाती की है।

बिहार सरकार ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाने के लिए बोट एंबुलेंस की शुरुआत की है। इस बोट एंबुलेंस पर ऑक्सीजन सिलेण्डर से लेकर फस्ट एड की सारी सुविधा मौजूद है। प्रशिक्षित नर्स के साथ साथ डाॅक्टर भी इस बोट एंबुलेंस पर मौजूद रहते है। जैसे ही किसी बाढ़ पीड़ित की तबियत बिगड़ने की खबर मिलती है यह बोट एंबुलेंस पानी के धार को काटती हुई सीधे उन तक पहुंच जाती है।

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सामान्य बोट एम्बुलेंस के अलावा कोरोना बोट एम्बुलेंस भी पानी पर तैरते देखने को मिल रही है। कोरोना बोट पर इमरजेंसी की सारी सुविधाएं उपलब्ध है। इस बोट पर पल्स मीटर, बेड, ऑक्सीजन सिलिंडर समेत कई सुविधा प्रदान की गई है। राघोपुर का जमींदारी बांध हो या खगड़िया का अलौली प्रखंड या फिर गोपालगंज का बैकुंठपुर; सभी जगहों पर राहत की नाव मौजूद है।

ऐसे में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए यह बोट एंबुलेंस बरदान साबित हो रहा है।

—– संजीव कुमार

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