ठनका, बिहार और मौतें…

0
SHARE

इस मानसून बिहार में 500 से अधिक लोगों की मौत ठनका गिरने से हुई है। यह सिलसिला लगातार जारी है। ठनका गिरना कई बातों पर निर्भर करता है जिसमें सबसे महत्वपूर्ण होता है उसकी ऊंचाई। थोड़ी सावधानी से जानमाल की क्षति को न्यून किया जा सकता है। ठनका के कारणों और बचाव का उपाय समझ लेना आवश्यक है।
समुद्र का पानी भाप बनकर ऊपर उठता है और जैसे-जैसे ऊपर पहुंचता है ठंडा होने लगता है ठंडा होकर पानी की छोटी-छोटी बूंदों के रूप में इकट्ठा होकर बादल का रूप ग्रहण करने लगता है । इनका आकार लगातार बढ़ते रहता है एवं ये ठंडे होते रहते हैं ।
बादल का ऊपरी सतह ठण्डा होकर बर्फ के छोटे-छोटे टुकड़ों में बदल जाता है जिनका आपस में एवं हवा के कणों से लगातार घर्षण होते रहता है जिसके कारण जिससे एक ऊर्जा क्षेत्र बनता है जिसे स्थिर ऊर्जा (स्टेटिक चार्ज) कहते हैं ।
प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन के चार्ज़ बराबर होते हैं लेकिन इलेक्ट्रॉन के भारी होने के कारण सारा पॉज़िटिव चार्ज़ बादलों के ऊपर वाले भाग में इकट्ठा हो जाता है और सारा नेगटिव चार्ज़ नीचे वाले भाग में । इससे बादलों के नीचे वाले भाग में ‘स्टेटिक नेगटिव चार्ज़’ बन जाता है ।

बादलों के विचरण के क्रम में इनके मध्य घर्षण द्वारा उत्पन्न ऊर्जा जिसे बिजली कड़कना भी कहते हैं। बादलों का कड़कना तीन तरह का होता है :-


 

1. बादलों के अंदर (Intra Cloud) बादलों के अंदर जब धन और ऋण आवेग एक दूसरे से टकराते हैं तब ऊर्जा उत्पन्न होती है जो बादलों के अंदर ही समाप्त हो जाती है।
2. बादलों के मध्य (Cloud to Cloud) दो बादल जब आपस मे टकराते हैं तब दोनों के धन एवं ऋण आवेगों के घर्षण से बिजली उत्पन्न होती है जो बादलों के मध्य चमकती है।
3. बादलों एवं धरती के मध्य (Cloud to Earth) जब बादलों का नीचे वाले ऋण आवेग धरती के धन आवेग की ओर आकर्षित होता है तब उनके मध्य ऊर्जा का संचार होता है जिसे बिजली गिरना या वज्रपात कहते हैं ।
बादलों के ऋण आवेग जैसे ही पृथ्वी के धन आवेग के सम्पर्क में आता है तब इनमें ऊर्जा का प्रवाह होता है जिसे Lightning Bolt (बिजली) कहते हैं।
बादलों के निचले हिस्से के ऋण आवेग धरती पर किसी धन आवेग के सम्पर्क में जब आते हैं तब ऊर्जा का एक परिपथ पूरा होता है जिसमें ऊर्जा का तेज प्रवाह होता है । ऊर्जा प्रकाश की गति से चलती है तथा बादलों एवं पृथ्वी के मध्य की हवाओं का उतनी ही तेजी से विस्थापित करती हैं इसलिये तेज आवाज सुनाई देती है जिसे बिजली कड़कना भी कहते हैं।
धरती पर पहुंचने के बाद बिजली को कंडक्टर की जरूरत पड़ती है । आकाशीय बिजली जब किसी धन आवेशित वस्तु के आस-पास से गुजरती है तब कंडक्टर का काम करता है। इसका औसत समय 1 सेकंड या उससे भी कम रहता है तथा इस प्रक्रिया के समय लगभग 27000* C तक का तापमान वहां प्राप्त हो जाता है इस कारण से वहां एक निश्चित स्थान पर बिजली गिरने से वहां के आसपास के क्षेत्र में भी इसका प्रभाव आ जाता है।

बिहार में बिजली क्यों गिर रही है :-


 

ओड़िसा,बंगाल,महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों को बिजली गिरने की स्थिति वाला अग्रणी राज्य माना जाता है ।
बिहार एवं UP द्वितीय स्थान पर आते हैं ।
बिहार पूरी तरह से समशीतोष्ण क्षेत्र (टेम्पेरट जोन ) के उप उष्णकटिबंधीय क्षेत्र (ट्रॉपिकल जोन) में स्थित है और इसका जलवायु प्रकार आर्द्र (ह्यूमिड) उप उष्णकटिबंधीय (सब ट्रॉपिकल) है। यह 22 डिग्री उत्तर से 27 डिग्री अक्षांश तक फैला हुआ है। इसलिये इसका स्थान उष्णकटिबंधीय (ट्रॉपिकल) से उपोष्णकटिबंधीय (सब ट्रॉपिकल) है । इससे यहां सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में वाष्पोत्सर्जन की क्रिया भी तेजी से होती है ।
वर्तमान में बिहार में मॉनसून की दस्तक है एवं लगातार बारिश हो रही है । अर्थात बादलों की भरपूर उपस्थिति यहां है । ऊपर से स्थानीय वाष्पोत्सर्जन से बादलों के घनत्व में वृद्धि होती है एवं ये आकार में बड़े एवं भारी होते जाते हैं जिससे इनकी धरातल से दूरी घटती जाती है । जैसे-जैसे ये बड़े होते हैं इनके अंदर ऊर्जा की मात्रा भी बढ़ती जाती है । मैदानी क्षेत्रों में हवा भी लगातार चलती है जिससे ये ऊर्जा प्राप्ति के चरम पर पहुंच जाते हैं एवं जमीन पर खेत-पेड़,पोल इत्यादि धन आवेग प्रकृति वाले वस्तु (Object) की ओर आकर्षित होने लगते हैं ।
बादलों के नीचे ऋण आवेग रहता है ऐसे में ये धन वस्तुओं के संपर्क में आते ही तेजी से ऊर्जा का संचार भी प्रारम्भ कर देते हैं । इस तरह यह क्रिया बार-बार एवं तेजी के साथ हो रही है जिस कारण बिहार में लगातार बिजली गिरने की घटना हो रही है ।

बचाव के उपाय :-


 

  • बारिश के समय खुले क्षेत्रों में न निकले जैसे खेत-मैदान इत्यादि ।
  • बारिश में पेड़ के नीचे,लोहे के पोल,बिजली के तार,मोबाइल टॉवर इत्यादि जगहों पर ना रहें ।
  • जब बारिश की संभावना हो तो जल संग्रहित क्षेत्र जैसे तालाब, पोखर, नदी, नाले या पानी वाले खेत से तुरंत दूर हो जाये।
    सरकार ने भी इसके बचाव के लिये जागरूकता का प्रयास किया है साथ ही एक App (Vajrapaat) भी बनाया है जिसमें बिजली गिरने वाली जगहों एवं समय की सूचना लोगों की दी जाएगी जिससे वो इस खतरे से सतर्क हो पाएंगे।
    — सुशांत प्रकाश

LEAVE A REPLY