दानापुर को फिर आबाद किया घोंघिल ने

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बिहार में मानसून पूरे उफान पर है। वर्षा औसत से ज्यादा हो रही है। 30 जून तक बिहार में 177 MM वर्षा हो चुकी है जो कि औसत 169 CM से लगभग 8% अधिक है। ऐसी बारिश न सिर्फ मनुष्य बल्कि पशु-पक्षियों को भी आकर्षित करती है। कई प्रवासी पक्षी इस मौसम में खींचे चले आते हैं। इन्हीं में से हैं Asian Open bill Storks और Painted Storks जिन्हें घोंघिल एवं जाँघिल के नाम से भी जाना जाता है। ये पक्षी वर्तमान में पटना के दानापुर में बड़ी संख्या में आए हुए हैं।
दानापुर छावनी क्षेत्र के ऊंचे-ऊंचे पेड़ो ने इनको आकर्षित किया है एवं इनका नया घर भी बना है। अगले चार से पांच महीने तक ये पक्षी यहीं अपना ठिकाना बनाएंगे एवं प्रजनन क्रिया करेंगे।
Asian Open Bill Storks (घोंघिल) पक्षी की प्रजाति की खोज फ्रेंच पर्यावरणवीद पियरे बेनाटरे ने 1791 में की थी।
ये पक्षी दक्षिण एवं दक्षिण-पूर्व एशिया के उष्णकटिबंधीय वर्षा वनों में रहते हैं। लंबी गर्दन,टाँगे तथा चोंच के बीच खाली स्थान इसकी मुख्य पहचान है। इसके पंख काले-सफेद रंग के होते हैं। चोंच के मध्य खाली स्थान होने के कारण ही इनको Openbill कहा जाता है। मौनसून के समय में इनका प्रवास भारत के लगभग सभी मैदानी राज्यों (पहाड़ी एवं बर्फीले क्षेत्र को छोड़कर) में होता है।

निवास एवं भोजन


ये पक्षी अपना घोसला प्रायः ऊंचे पेड़ो पर ही बनाते हैं इसलिए दानापुर छावनी के ऊंचे पेड़ो ने इनको अपनी ओर आकर्षित किया है। ये लगभग अक्टूबर मध्य तक अब इन्हीं पेड़ो पर रहेंगे एवं उसके बाद पुनः अपने गंतव्य की ओर चले जाएंगे।
चूंकि ये मौनसून में ही यहां आते हैं इसलिये इनको स्थानीय लोग मौनसून का सूचक भी कहते हैं। इनको साइबेरियन पक्षी (सर्वथा असत्य) भी कहा जाता है। ये पक्षी पूर्णतः मांसाहारी होते हैं एवं घोंघा,मछली एवं केचुआ जैसे जलीय जीव इनका प्रिय भोजन है। ये पक्षी जीवनकाल में सिर्फ एक बार जोड़ा बनाते हैं एवं जीवन पर्यंत साथ रहते हैं। इनके घोंसलों का स्थान भी निश्चित होता है, प्रत्येक वर्ष ये वहीं अपना घोंसला बनाते हैं जहां पूर्व के वर्ष में बनाया था।

प्रजनन


इनका प्रजनन काल जून से अक्टूबर के बीच होता है । सामान्तया मादा एक बार में 3 से 4 अंडे देती है। प्रजनन काल में दोनों पक्षी बराबर की भूमिका निभाते हैं जैसे घोंसले बनाना,चूजों के भोजन की व्यवस्था एवं सुरक्षा।

Asian Open bill Storks
Asian Open bill Storks

विशेषता


इनका जिस क्षेत्र में प्रवास होता है वहां परजीवियों से होने वाली बीमारियां जैसे बुखार, डायरिया, लीवरफ्लू, पथरी जैसी बीमारियां नियंत्रण में आ जाती हैं। चूंकि घोंघा परजीवियों का प्रधान वाहक होता है एवं ये पक्षी घोंघा को प्रचुर मात्रा में खा जाते हैं इससे परजीवियों द्वारा होने वाला संक्रमण रुक जाता है क्योंकि उनका जनमानस से सम्पर्क का माध्यम ही समाप्त हो जाता है। इसी कारण से इन पक्षियों के आगमन को ‘शुभ शगुन’ माना जाता है। इन पक्षियों को कोई हानि नहीं पहुंचाता।

पुनर्वापसी


ये पक्षी मॉनसूनी क्षेत्र के पक्षी हैं एवं भारत में मॉनसून सितम्बर के अंत तक लगभग समाप्त हो जाता है एवं शीत का प्रवेश हो जाता है जो कि इन पक्षियों के निवास के प्रतिकूल है। अतः ये पक्षी अपने चूजों के वयस्क (उड़ने लायक) होने के बाद अक्टूबर के अंत तक अपने गंतव्य की ओर प्रस्थान कर जाते हैं।

—सुशांत प्रकाश

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