अपनी बेटियों को चाँद जैसा नहीं बल्कि सीता जैसी बनाएं : लक्ष्मीमाता साध्वी

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नारी तो स्वयं शक्ति की अवतार है, अपने बच्चों की प्रथम गुरू है और उसका परिवार उसके पाल्य की पाठशाला है। इसलिए माताओं का जीवन सम्पूर्ण रूप से हिन्दू जीवन पद्धति से जुड़ा होना चाहिए। हमारा भोजन भारतीय भोजन, हमारा परिधान, भारतीय परिधान हमारी भाषा, मातृभाषा होनी चाहिए। उक्त बातें विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान की दक्षिण बिहार की मातृ-भारती की प्रांतीय टोली की बैठक में ऑनलाईन अध्यक्षता करते हुए सासाराम की लक्ष्मीमाता साध्वी ने कहीे। उन्होंने कहा कि नारी की मर्यादा हीं उसका अलंकार है। इसलिए अपनी बेटियों को चाँद जैसा नहीं बल्कि सीता जैसी बनाएं।
बैठक में भारती शिक्षा समिति के प्रदेश सचिव गोपेश कुमार घोष ने कहा कि विद्या भारती शिक्षा के क्षेत्र में नित्य नूतन प्रयोग करते रहती है उसी के आयाम हैं बालिका शिक्षा जिसका उद्देश्य है राष्ट्रभक्त तेजस्वी बालिका का निर्माण।
भारती शिक्षा समिति के प्रदेश सहसचिव प्रकाशचन्द्र जायसवाल ने अपनी बातों को रखते हुए कहा कि सम्पूर्ण देश के सरस्वती शिशु/विद्या मंदिर के विद्यालयों में मातृ-भारती एक ऐसा संगठन है जिसके माध्यम से हम विद्यालय की बहनों के नैसर्गिक गुणों का संरक्षण, संवर्धन व संपोषण कर रहें हैं। मुंगेर से मातृ-भारती प्रांत टोली के विषयों का संयोजन बालिका शिक्षा की क्षेत्रीय संयोजिका कीर्ति रश्मि द्वारा किया गया। वहीं इस बैठक में भागलपुर से बालिका शिक्षा परिषद की सह संयोजिका सरिता कुमारी, संगीता तिवारी, मधु चन्द्रायन मुंगेर से बालिका शिक्षा की प्रांत संयोजिका सुनीता कुमारी, रश्मिबाला सिन्हा, नीतु मिश्रा, पटना से उर्मिला पाल, रोहतास से प्रमिला गुप्ता, गया से मुनीता कुमारी, भोजपुर से पूनम कुमारी, रेखा तिवारी, नालन्दा से अमिता सिन्हा उपस्थित रही।

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