कृतज्ञ बिहार ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय को सम्मानित किया

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एकात्म मानववाद के महान चिंतक, संगठन कर्ता, अपने विचारों से राजनीति के क्षेत्र में नए अध्याय जोड़कर भारत को विश्व गुरु बनने की ओर अग्रसर करने वाले महान पुरुष पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की पुण्यतिथि विशेष रूप से मनाई गई।
उनके पुण्यतिथि पर पटना के राजेंद्र नगर के रोड नंबर 3 स्थित पार्क में भव्य प्रतिमा स्थापित की गई। प्रतिमा लोकार्पण के दौरान बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे, पथ निर्माण मंत्री नंदकिशोर यादव सहित कई बड़े नेता व समाजसेवी मौजूद रहे।
दीनदयाल जी की पुण्यतिथि बिहार के लिए विशेष महत्त्व रखती है। उनकी हत्या पटना आने के क्रम में ही हुई थी। इस रहस्यमय मृत्यु को लेकर आज तक भ्रम है।
पटना में बिहार प्रदेश भारतीय जनसंघ की कार्यकारिणी बैठक होने वाली थी। इस विषय को लेकर बिहार जनसंघ के तत्कालीन संगठन मंत्री अश्विनी कुमार ने पंडित जी से बैठक में उपस्थित होने की इच्छा जाहिर की थी ताकि जनसंघ के कार्यकर्ताओं को पंडित जी का मार्गदर्शन प्राप्त हो सके। पंडित दीनदयाल जी उस समय लखनऊ में अपनी मुंह बोली बहन लता के घर ठहरे हुए थे। उन्होंने अश्विनी कुमार के इच्छा को स्वीकार कर लिया। उसके बाद उन्होंने पठानकोट-सियालदह एक्सप्रेस में प्रथम श्रेणी की टिकट करवा कर  पटना के लिए रवाना हो गए। उस ट्रेन में भारतीय भौगोलिक सर्वेक्षण के असिस्टेंट डायरेक्टर एमपी सिंह व कांग्रेसी एमएलसी सदस्य गौरी शंकर राय भी थे।

pandit dindyal

पंडित जी का सफर शुरू हुआ, लखनऊ से चलकर ट्रेन लगभग आधी रात को जौनपुर पहुंची। जौनपुर के महाराजा दीनदयाल के दोस्त थे। उन्होंने अपने सेवक कन्हैया के हाथों एक पत्र दीनदयाल उपाध्याय को भिजवाया और रात को 12 बजे उन्हें पत्र मिला। ट्रेन चली और उसी रात लगभग  2:15 पर ट्रेन मुगलसराय स्टेशन पहुंची।
पठानकोट-सियालदह एक्सप्रेस ट्रेन पटना नहीं आती थी इसलिए बोगी काटकर दिल्ली-हावड़ा ट्रेन में जोड़ दिया गया। लगभग 2:50 पर ट्रेन फिर से पटना के लिए चली उसके बाद अति प्रातः उनका शव मुगलसराय जंक्शन  (अब पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन ) ट्रेन की पटरियों पर मिला।
पटना जंक्शन पर बिहार जनसंघ के नेता पंडित जी का इंतजार कर रहे थे। 11 फरवरी को सुबह 9:30 बजे जब दिल्ली-हावड़ा ट्रेन मोकामा स्टेशन पहुंची तो पुलिस ने उनका सूटकेस और अन्य सामान बरामद किया।
पंडित दीनदयाल जी का सूटकेस तो मिल गया लेकिन रहस्यमई मौत का पर्दा अभी तक उठ नहीं पाया है। पिछले वर्ष मुगलसराय स्टेशन का नाम परिवर्तित कर पंडित दीनदयाल उपाध्याय कर दिया गया है।

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