राजस्थान सरकार का असंवैधानिक फ़रमान – संघ से सबंधों का ब्यौरा दें सरकारी कर्मचारी

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राजस्थान की कांग्रेस सरकार ने अपने राज्य के कर्मचारियों के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाते हुए, उन सरकारी कर्मचारियों की पहचान करने की कवायद शुरू कर दी है जो आरएसएस के कार्यकर्ताओं में शामिल हैं। ऐसा किसी और संगठन में शामिल करमचारियों के खिलाफ फरमान जारी नहीं किया जाता है. और ये पहली बार ऐसा नहीं हुआ है ऐसा कई बार देखने को मिला है।
अजमेर के अतिरिक्त जिला कलेक्टर कैलाश चंद्र शर्मा ने एक परिपत्र जारी कर राज्य कर्मचारियों को नाम, उपनाम, विभाग और वह जिस आरएसएस की शाखा से जुड़े हैं उसके नाम का विवरण देने के लिए स्व-घोषणा पत्र प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया है
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, गृह विभाग ने सभी जिला कलेक्टरों को ऐसी सूचना एकत्र करने का निर्देश दिया है।
गंगापुर सिटी (सवाईमाधोपुर) के विधायक रामकेश मीणा द्वारा राज्य विधान सभा में 27 जून से 5 अगस्त के बीच आरएसएस की शाखाओं के साथ सरकारी कर्मचारियों के संबंध में उठाए गए सवाल ने कांग्रेस सरकार को यह जानकारी जुटाने के लिए प्रेरित किया है।
उन्होंने यह जानने की कोशिश की थी कि राज्य में आरएसएस की कितनी शाखाएँ हैं और कौन-कौन सी जगहों पर चालू हैं। वह इन शाखाओं में सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों की भागीदारी के स्तर और उनके खिलाफ कार्रवाई के बारे में सरकार के दृष्टिकोण को भी जानना चाहते थे।
इससे पहले, सिरोही के विधायक संयम लोढ़ा ने सरकार से यह कहते हुए एक सवाल पूछा था कि 1971 के नियमों के अनुसार, सरकारी कर्मचारी ऐसे संगठनों में शामिल होने के लिए प्रतिबंधित थे।
राजस्थान में कांग्रेस सरकार द्वारा उठाए गए इस कदम पर भाजपा से तीखी प्रतिक्रिया हुई है। एक वरिष्ठ विधायक और वसुंधरा राजे सरकार में एक पूर्व मंत्री ने इस कदम को राज्य के कर्मचारियों पर अघोषित आपातकाल लगाने का प्रयास कहा है।’
अजमेर के बीजेपी विधायक वासुदेव देवनानी ने सर्कुलर की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि “अतिरिक्त जिला कलेक्टर का यह पत्र निंदनीय है। आरएसएस एक सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन रहा है और इसलिए सरकारी कर्मचारियों से इस तरह की स्व-घोषणा की मांग असंवैधानिक है। ”
आरएसएस के एक कार्यकर्ता ने भी इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि डेटा संग्रह इन कर्मचारियों को धमकाने के लिए था। उन्होंने कहा “यह सरकारी कर्मचारियों को धमकी देने का एक प्रयास है, लेकिन इससे कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा”।
इस बीच, इस कदम को सही ठहराते हुए, अतिरिक्त जिला कलेक्टर ने कहा कि विधानसभा में पूछे गए प्रश्न का उत्तर तैयार करने के लिए यह जानकारी मांगी गई थी।

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