6 दिसंबर: शौर्य दिवस नहीं बल्कि सद्भाव का संदेश देगा विहिप, मठ-मंदिरों व घरों में जलाए जाएंगे दीप

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अयोध्या में राम मंदिर निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इस बार अयोध्या में विवादित ढ़ाचें के ढाहाए जाने के 27 साल होने पर बहुत कुछ बदला दिखेगा।
इस बार विहिप(विश्व हिन्दू परिषद) ने 6 दिसंबर को शौर्य व विजय दिवस न मनाते हुए इसे अलग अंदाज में मनाने व सद्भाव का संदेश देने की तैयारी में जुट गया है। इस बार विहिप द्वारा 6 दिसंबर को मठ-मंदिरों व घरों में दीप जलाए जाएंगे एवं भजन-कीर्तन किया जाएगा।
यह भी है वजह


संघ परिवार और संत कोई भी ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होने देना चाहते जिससे दूसरे पक्ष को इस मामले में नया विवाद खड़ा करने का मौका मिले। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के तुरंत बाद सार्वजनिक रूप से इसे जीत या हार का प्रश्न न बनाने का आह्वान किया है।
संघ व विहिप के सूत्र के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद इसे हिंदुओं की जीत बताने या जश्न मनाने से समाज में तनाव फैल सकता है।
शौर्य व विजय दिवस का औचित्य नहीं


श्रीराम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास ने दो दिन पहले कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने 9 नवंबर को फैसला सुना चुका है इसलिए अब ‘शौर्य व कलंक’ जैसे कार्यक्रमों का औचित्य नहीं।
विहिप के मीडिया प्रभारी शरद शर्मा ने कि सर्वोच्च न्यायालय के इतने बड़े फैसले को विहिप दो-चार घंटे में सीमित नहीं करना चाहती। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 6 दिसंबर सहित अन्य सभी तारीखें इतिहास का हिस्सा बन चुकी हैं। अब तो 9 नवंबर को याद रखने की जरूरत है जिस तारीख को रामलला के भव्य और दिव्य मंदिर निर्माण का मार्ग को प्रशस्त हुआ।

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