हमें राष्ट्र का निर्माण नहीं, बल्कि पुनर्निर्माण करना है : भय्याजी जोशी

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सरकार्यवाह भय्याजी जोशी ने कहा कि “भारत के लोग बड़े भाग्यशाली हैं कि भारत में ईश्वर निष्ठ व्यक्ति हमेशा से अवतरित होते रहे हैं. स्वर्गीय दत्तोपंत ठेंगड़ी ईश्वर के श्रेष्ठ साधक तपस्वी थे. अहंकार का कोई अंश भी उनमें नहीं था. वे एक श्रेष्ठ योगी थे. राजयोग, कर्मयोग तथा ज्ञानयोग जैसे विभिन्न योगों की सीमाओं के बिना इन योगों के सारे लक्षण उनमें विद्यमान थे. वे कहते थे कि हमारा कार्य ईश्वरीय कार्य है, इसलिए उसका सफल होना तय है. हम इस ईश्वरीय कार्य के केवल श्रेष्ठ साधन बन सकते हैं.
उन्होंने कहा कि ठेंगड़ी जी के अनुसार संघ समाज से अलग नहीं है. हिन्दुओं के सारे प्रश्न संघ के प्रश्न हैं. हमारा राष्ट्र निर्माणाधीन नहीं है, हमें राष्ट्र का निर्माण नहीं करना, बल्कि पुनर्निर्माण करना है. ठेंगड़ी जी ने कहा था कि हमें क्रांति नहीं करनी है, बल्कि युगानुकूल परिवर्तन करना है. अपनी दूरदर्शिता के चलते वे परिस्थिति का बेहतर आंकलन कर सकते थे.

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दृष्टा लोगों द्वारा आत्मविश्वास से कहे गए वचन हमें बल देते हैं. जब हर तरफ साम्यवाद का बोलबाला था, तब उन्होंने भविष्यवाणी की थी कि साम्यवाद नहीं टिकेगा. आपातकाल का भविष्य भी उन्होंने बताया था. सन् 1989 में उन्होंने कहा था कि नई शताब्दी के सूर्योदय का रंग भगवा होगा और उसका प्रमाण हम देख रहे हैं. स्व. ठेंगड़ी जी के बताए अनुसार, जीवन के मूल्य और जीवन की शैली यही भारत की विश्व को देन है. अब जागरण शुरू हुआ है और सारा विश्व मार्गदर्शन के लिए भारत की ओर देख रहा है और शक्तिशाली समाज ही विश्व को सही दिशा दिखा सकता है. इस संदर्भ में आज स्व. ठेंगड़ी जी के वचन सही साबित हो रहे हैं.

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