बातचीत- रॉयल रे सलाम (मणिपुर निवासी), मुद्दा – पूर्वोत्तर और उत्तर भारत की संस्कृति

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1.क्या पूर्वोत्तर राज्यों में आज भी अलगाववादी तत्व सक्रिय हैं?

उत्तर:- भारत देश को अलग करने की सोच रखने वाले कभी सफ़ल नहीं हो सकते हैं। हाँ, एक समय ऐसा था जब अलगाववादी तत्व पूर्वोत्तर राज्यों में अधिक सक्रिय थी। आज के समय यह विलुप्त हो चुकी हैं। हम सब एक ही देश के वासी हैं। कुछ ऐसे लोग थे जो इस देश को तोड़ना चाहते हैं। वह कभी अपने इरादों में सफ़ल नहीं होंगे।

2. बिहार और मणिपुर की संस्कृति में क्या अंतर देखते हैं?

उत्तर:- संस्कृति के मामले में दोनों राज्यों
में अधिक अंतर देखने को नहीं मिलता है। भाषाई अंतर है, फिर भी काम चल
जाता है। दोनों जगह के लोग मिलनसार लगे। रहन- सहन का तरीका भिन्न है।

3. बिहार के प्रति आपकी क्या मानसिकता है?

उत्तर :- आप बुरा न माने तो मैं यह कहना चाहता
हूँ, पहले मैं भी यही मानता था कि बिहार बहुत खराब जगह होगा। गुंडाराज
होगा। ऐसी सोच तब थी जब मैंने बिहार को नहीं देखा था। किसी को जाने बगैर उसके बारे
में राय बना लेना गलत होता है। इन कुछ दिनों में लगा ही नहीं मैं किसी दूसरे जगह
हूँ। बिहार में वही अपनापन मिला जो हमें हमारे पूर्वोत्तर राज्यों में मिलता है।

4.  अंतर राज्य – छात्र जीवन दर्शन के बारे में कुछ कहना चाहते हैं?

उत्तर:- SEIL और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के तरफ से यह बहुत खूबसूरत परियोजना है। हर साल छात्रों का एक दल पूर्वोत्तर के राज्यों के भ्रमण पर जाता है, और छात्रों का एक दल पूर्वोत्तर से बिहार, उत्तर प्रदेश की ओर आता है। इससे एक दूसरे के प्रति जानने का मौका उपलब्ध होता है। हम अपने देश को और नजदीक से देख पाते हैं। इसकी खूबसूरती तब बढ़ जाती है जब इन छात्रों को स्थानीय लोगों के यहाँ प्रवास पर रखा जाता है। सभी छात्रों को भरपूर अपनापन और प्यार मिलता है।

वार्ताकार- अभिलाष दत्ता

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