बातचीत – कृपा सिंह (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष), मुद्दा – वनवासी कल्याण आश्रम

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बातचीत- कृपा सिंह (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष), मुद्दा – वनवासी कल्याण आश्रम

1.वनवासी कल्याण आश्रम क्या है?

उत्तर- वनवासी कल्याण आश्रम की शुरुआत 26 दिसंबर, 1952 को जशपुर (छतीसगढ़), जो झारखंड राज्य के गुमला सीमा के पास हुई स्थित है। वनों में रहने वाले हमारे भाई- बहन के सतत विकास के लिए इसकी स्थापना हुई थी। आज़ादी के बाद वनवासियों पर ईसाई मिशनरियों का प्रभाव अधिक था, जो भारत देश के लिए खतरा था। इस खतरे के मद्देनजर संस्था की नींव पड़ी।
11 करोड़ वनवासी लोगों के लिए वनवासी कल्याण आश्रम कार्य करती है। अपने देश में 600 से अधिक जनजातियां हैं।सभी जनजातियों में सनातनी जीवन पद्धति के लक्षण व्याप्त हैं।

2.वर्तमान में वनवासी समाज में ईसाई मिशनरियों का कितना प्रभाव है? ईसाई मिशनरियों के प्रभाव को रोकने के लिए वनवासी कल्याण आश्रम की तरफ से क्या कदम उठाए जा रहे हैं?

उत्तर:- आज भारत में पौने दो करोड़ ईसाई हैं। उसमें से 90 लाख ईसाई वनवासी समाज से हैं। ईसाई मिशनरियों ने लालच देने का काम करके धर्मांतरण करवाया। ईसाई मिशनरी वनवासी शब्द का भी विरोध करती है। उनके हिसाब से यह शब्द पिछड़ों के लिए है। जबकि अपने यहाँ के वेदों में लिखा है वनवासी वह है जो ऋषि मुनियों को वन में रहने के दौरान सहयोग प्रदान किया करते थे। संस्कृति के आधार पर वनवासी हमसे बहुत आगे हैं।
वनवासी कल्याण आश्रम में किसी भी तरह का भेदभाव नहीं है। संस्था के बहुत से सेवा प्रकल्प चलते हैं। एकल (शिक्षक) विद्यालय , प्रशिक्षण वर्ग इत्यादि के तहत हम उनके बीच उनके लिए कार्य करते हैं।

3.बिहार – झारखंड में वनवासी कल्याण आश्रम की क्या स्थिति है?

उत्तर:- झारखंड में लगभग सभी जिलों में वनवासी कल्याण आश्रम कार्य कर रही है। झारखंड में जो सुदूरवर्ती इलाके हैं वहाँ एकल शिक्षक विद्यालय के तहत शिक्षा दी जाती है। सभी विषयों के साथ सनातनी धर्म को ऐच्छिक विषय के तौर पर पढ़ाते हैं। भारत के प्रचलित 4 खेल कबड्डी, खो-खो, तीरंदाजी और मैराथन को हम अपने विद्यालयों में आयोजित करवाते हैं।
बिहार में इसका मुख्यालय मुज़फ़्फ़रपुर में हैं। रोहतास, पूर्वी और पश्चिम चंपारण, पूर्णिया, किशनगंज, भागलपुर, बांका, जमुई इत्यादि जगहों पर कार्य चलते हैं।

4.वनवासी कल्याण आश्रम की भविष्य की क्या योजनाएं हैं?

उत्तर:- आज भारत में 1 लाख 52 हज़ार वनवासी गाँव है। जिसमें हमारी पहुँच 52 हज़ार गाँव तक है। हमारी पहली योजना है हम सभी गाँव तक पहुँचे। नियमित कार्यकर्ता को बढ़ाना है। सेवा प्रकल्पों की संख्या बढ़ानी है।

वार्ताकार- अभिलाष दत्ता

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