बातचीत-प्रो.पी.वी. कृष्णभट्ट जी (राष्ट्रीय समाज विज्ञान के संरक्षक), मुद्दा- रास्ते निर्माण में समाज विज्ञान का महत्व

0
SHARE
बातचीत-प्रो.पी.वी. कृष्णभट्ट जी (राष्ट्रीय समाज विज्ञान के संरक्षक), मुद्दा- रास्ते निर्माण में समाज विज्ञान का महत्व
1. राष्ट्र निर्माण में सामाजिक विज्ञान की क्या भूमिका है?


उत्तर:- इसका जवाब ढूंढने से पहले हम सभी को राष्ट्र औऱ समाज की परेशानियों को पता करना होगा। सबसे बड़ी दिक्कत अपने देश के साथ यह हुई कि अपने देश का इतिहास लिखने का काम दूसरे देशों के लोगों ने किया। विदेश की सिध्दांतों को अपने देश में लागू किया जा रहा है। विदेशों में विकाश का पैमाना है बड़ी – बड़ी इमारतें, विज्ञान इत्यादि। अपने देश की विचारधारा धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की रही है। जिससे मनुष्य का बौद्धिक विकास होता है। पर दूसरे देशों के अनुयायी बनते हुए हम अपने विचारों से अलग होते जा रहे हैं।
इस चीज़ को कभी भी विज्ञान सही तरीके से समझाने में असमर्थ है। इसलिए सामाजिक विज्ञान के विषयों की पढ़ाई अत्यंत जरूरी है। दिक्कत यहाँ भी है , सामाजिक विज्ञान के विषयों को समझने के अनुसार लिखा ही नही गया है। बच्चे इसे सिर्फ रट के परीक्षा पास होने तक याद रखते हैं।
2. वर्तमान में अधिकतर बच्चों का रुझान विज्ञान संकाय की ओर रहता है। मानविकी और सामाजिक विज्ञान संकायों की सीटें खाली रह जाती है। इस स्थिति में किस तरह का समाज निर्माण होगा?


उत्तर:- मानविकी और सामाजिक विज्ञान के विषयों को अपडेट होने की जरूरत है। वरना वह अपनी अहमियत खो देगी। हर विषय की अपनी एक विशेष फिलॉसफी होती है, उस आधार पर उस विषय को तैयार करना चाहिए। बिना सामाजिक विज्ञान के विज्ञान अधूरा है, क्योंकि सभी विषय एक दूसरे के बिना अधूरे हैं। मानव जीवन में केवल विज्ञान रह जाए तो वह केवल मशीन बन के रह जाएगा। समाज मे संतुलन बना रहे इसके लिए सामाजिक विज्ञान और मानविकी की जरूरत है।
3. मानव सिर्फ मशीन बन के न रहे , इसके लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं?


उत्तर:- सबसे पहले सामाजिक विज्ञान के स्कूली स्तर के पाठ्यक्रम को राष्ट्रीयता के हिसाब से तैयार करना होगा। दूसरा, पाठ्यक्रम को अपडेट करना होगा। आज के समय सामाजिक विज्ञान की पाठ्यक्रम ऐसी है जिसे पढ़ने के बाद व्यक्ति को अपने देश से ही नफरत की भावना जागृत हो जाती है। सामाजिक विज्ञान में सैद्धांतिकके साथ – साथ प्रायोगिक क्लासेस की व्यवस्था होनी चाहिए।
4. बिहार की राजनीति में तमाम सभी बड़े दल के बड़े नेता विज्ञान पृष्ठभूमि से आते हैं। जिनके लिए विकास का अर्थ सिर्फ ऊंची – ऊंची इमारतें, पुल इत्यादि दिखाई देतर हैं। यह मानव के समग्र विकास के लिए  कुछ विचार नहीं देते हैं। ऐसे में आम जनता को कैसे समग्र विकास के बारे में पता चल सकता है?


उत्तर:- यह एक तरह का विरोधाभास की स्थिति नज़र आती है। राजनीति में विज्ञान क्षेत्र के लोगों का प्रभुत्व। इस स्थिति में समाज मशीन नहीं बनेगा तो क्या बनेगा। जनता को खुद आत्ममंथन की जरूरत है उन्हें अपने जीवन में क्या चाहिए। इसके लिए उन्हें अच्छे साहित्य का पाठन, साथ में सामाजिक विज्ञान के किताबों का अध्ययन  करना चाहिए।
5. भारतीय परिवार और आज के बच्चों को सामाजिक विज्ञान और मानविकी के विषयों के महत्व को कैसे बताया जा सकता है?


उत्तर:-  सामाजिक विज्ञान और मानविकी के विषयों का सही पाठ्यक्रम तैयार करवा के। बौद्धिक लोगो के द्वारा इसके बारे में सेमिनार कर के बताया जा सकता है। मीडिया के लोग इसके बारे में लिख सकते हैं। बच्चों को जानना होगा कि इस क्षेत्र में काफी संभावनाएं हैं।

LEAVE A REPLY