बिहार में उठी एनआरसी की मांग, 14 जिला मुख्यालयों में दिया गया धरना

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बिहार, 24 अक्टूबर। बिहार का सिमांचल आज बंगलादेशी घुसपैठ से ग्रसित है. घुसपैठ की वजह से इन इलाकों में जनसंख्‍या असंतुलित हो गई है. जिसके कारण क्षेत्र का सामाजिक और राजनीति संतुलन भी बिगड़ा है. साथ ही सामाजिक समरसता में भी कमी आई है. इस कारण कानून व्‍यवस्‍था और क्षेत्र का आर्थिक पक्ष भी प्रभावित हुआ है. इन बातों को लेकर बिहार के 14 सीमावर्ती जिला मुख्यालयों में बिहार बचाओ संघर्ष समिति द्वारा धरना दिया गया. इन जिलों में किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार, अररिया, सुपौल, सहरसा, मधेपुरा, मधुबनी, दरभंगा, सीतामढ़ी, शिवहर, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, बगहा शामिल है.
सीमावर्ती जिलों में जमीन पर अवैध कब्ज़ा कर रहे बंगलादेशी
बिहार बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष किशोर कुमार उर्फ मुन्ना ने कहा कि पूरे बिहार के सीमावर्ती जिलों में बंगलादेशी घुसपैठियों के प्रकोप से यहां के सभी मूल समुदाय के लोग परेशान हैं. यह बांग्लादेशी घुसपैठिए स्थानीय लोगों की जमीन पर अवैध कब्जा कर रहे है. राजनेताओं की सह पर वोट बैंक के लिए जाली पहचान पत्र भी बनवा दिया जा रहा है. सरकार को इन बातो पर ध्यान देने की आवश्यकता है. बंगलादेशी आज जाली नोट की तस्करी एवं ड्रग आदि के कारोबार को इन क्षेत्रों में स्थापित कर दिया है.
लगातार बढ़ रहा बांग्लादेशी घुसपैठिए की संख्या
बांग्लादेशी घुसपैठिए की जनसंख्या दिन प्रतिदिन बढ़ रही है. आज सीमांचल के चार जिले किशनगंज, पूर्णिया कटिहार एवं अररिया की कुल जनसंख्या 1981 में 25,25,231 की 32% थे. यह मुस्लिम जनसंख्या 1971 तक बढ़कर सिर्फ किशनगंज में 64.97%, कटिहार में 36.58%, पूर्णिया में 40.2% तक हो चुकी है. इसलिए सीमावर्ती 14 जिला मुख्यालय में बुधवार को महाधरना के माध्यम से एनआरसी लागू करने, जनसंख्या नियंत्रण एवं घुसपैठियों तथा रोहिंगया को भारत से निकालने की मांग राज्य व केंद्र की सरकार से की गई.
सन् 1981 में यह प्रतिशत 56 फीसदी हो गया। सन् 1991 में 60 फीसदी से उपर हो गया। अगर सिर्फ 2001 से 2011 के बीच की बात करे तो दस सालों में आबादी 27.95 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई, जबकि इस अवधि में हिंदुओं की जनसंख्‍या में वृद्धि दर महज 24.61 फीसदी रही.

सीबीई के अधिकारी ने भी स्वीकारी किया घुसपैठ की बात
CBI  के पूर्व निदेशक योगेंद्र सिंह ने भारत में पांच करोड़ अवैध नागरिक के रहने की बात कही है। इस घुसपैठ को सरकार ने भी स्‍वीकारा है. 10 जुलई 1982 को लोकसभा में गृह राज्‍यमंत्री निहाल चंद ने स्‍वीकार किया था कि बांग्‍लादेश से असम, बंगाल और बिहार में घुसपैठ हुआ है. सन् 1991 में भी लोकसभा में गृह राज्‍यमंत्री एम.एम. जैकर ने घुसपैठ की बात स्‍वीकारी थी.

राजनीतिक क्षेत्र में अपनी जाड़े जमा चूका बंगलादेशी  
सीमावर्ती क्षेत्र में घुसपैठियों द्वारा मतदाता सूची में नाम जुड़वाकर मतदान का अधिकार परिणामस्‍वरूप इन क्षेत्रों में जहां पहले हिंदू चुनाव जीतते थे, वहां अब मुस्लिम जीतने लगे हैं. कसबा, अररिया, कटिहार, बारसोई, बरारी, मनिहारी, प्राणपुर, सिकटा, ढाका, बिष्‍फी, केबटी, महिषी आदि में भी राजनीतिक परिवर्तन देखने को मिलने लगा है.
उपरोक्‍त विधानसभाओं में प्राय: मुस्लिम ही चुनाव जीतने लगे हैं. पहले इन क्षेत्रों में ग्राम पंचायत में मुखिया – सरपंच 70 फीसदी हिंदु हुआ करते थे. मगर आज यह मात्र 25 फीसदी हिंदू ही मुखिया-सरपंच बन पाते हैं. किशनगंज और कटिहार लोकसभा क्षेत्र से विजय या चुनाव लड़ने वाले अनेक मुस्लिम नेता इस क्षेत्र से बाहर के हैं.

राष्‍ट्र विरोधी गतिविधियां को बढ़ावा दे रहा बांग्‍लादेश
सीमावर्त्ती जिलों से बांग्‍लादेश में तस्‍करी के माध्‍यम से बढ़े पैमने पर मवेशी भेजे जाते हैं. आवश्‍यक वस्‍तुओं की बांग्‍लादेश में तस्‍करी के माध्‍यम से पहुंच रहे हैं. 14 मार्च 2018 को अररिया लोकसभा उपचुनाव नतीजे के तुरंत बाद पाकिस्‍तानी झंडा फहराया गया और पाकिस्‍तान जिंदाबाद और भारत तेरे टुकड़े – टुकड़े होंगे का नारा लगाया गया. हथियार की तस्‍करी, छोटे बच्चियों की तस्‍करी, आतंकवादी गतिविधियों के साथ – साथ धार्मिक उन्‍माद फैलाया जा रहा है. भारत और नेपाल के बीच में नो मेंस लैंड पर इन घुसपैठियों द्वारा धर्म और शिक्षा के प्रसार के नाम पर अवैध तरीके से राष्‍ट्र विरोधी कार्यों को अंजाम दिया जाता है.
इन मुद्दों को ध्यान में रखते हुए अवैध बांग्‍लादेश नागरिक और रोहिंगया को देश से निकालने के लिए नेशनल रजिस्‍टार ऑफ सिटिजन (NRC) बिहार में जल्द से जल्द लागू करने की मांग उठी.

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