फिल्मी दुनिया के बी.आर.इशारा के चौदह सौ रुपये की कहानी

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पटना, 7 सितंबर। बी.आर.इशारा का पूरा नाम बाबू राम इशारा था। बचपन में इन्हें रोशन लाल शर्मा नाम से भी पुकारा जाता था। 07 सिंतबर 1934 को हिमाचल प्रदेश के उना जिले के चिंतपूर्णी गाँव में जन्मे बाबू राम इशारा ने हिंदी फिल्मों में निर्देशक, लेखक, निर्माता, पटकथा लेखन, संवाद लेखन इत्यादि कार्यों को किया। वह बहुमुखी प्रतिभा के व्यक्ति थे।
अपने चाचा की संदूक से चौदह सौ रुपये चुरा कर बी.आर. इशारा मुम्बई भाग गए। हाथ में हुनर न होने की वजह से उन्होंने लोगों के घरों में काम किया। बर्तन मांजना, आटा पिसवाना, इत्यादि घरेलू कार्यो करते हुए समाज के पाखंड और दोहमुहेपन को खूब नज़दीक से देखा। धीरे-धीरे बॉलीवुड में पहचान बननी शुरू हुई। गायक मुकेश की फ़िल्म ‘अनुरोध’ में उन्होंने प्रशिक्षु के तौर पर काम किया। उसके बाद लेखन में हाथ आजमाया। सहायक बन कर निर्देशन का भी काम सीखा। 1966 में बसु भट्टाचार्य की आयी फ़िल्म ‘तीसरी कसम’ में बतौर सहायक निर्देशक का काम किया।
1964 से लेकर 1996 के बीच में बीआर इशारा ने 35 फ़िल्मो का निर्देशन किया। जिसमें ‘चेतना’, ‘लोग क्या कहेंगे’, ‘मिलाप’, ‘घर की लाज’, ‘सौतेला’ इत्यादि फ़िल्मो को सर्वाधिक पसंद किया गया।
सन 1984 में बॉलीवुड अभिनेत्री ‘रेहाना सुल्तान’ से वह शादी के बंधन में बंध गए।
77 वर्ष की आयु में टीबी जैसी बीमारी से लड़ते हुए बीआर इशारा 24 जुलाई 2012 में उनका निधन हो गया।

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