बातचीत रामविलास पांडेय, सचिव बिहार स्विमिंग एसोसिएशन मुद्दा- बिहार में स्विमिंग पुल की स्थिति

0
SHARE
बातचीत रामविलास पांडेय, सचिव बिहार स्विमिंग एसोसिएशन

बातचीत रामविलास पांडेय, सचिव बिहार स्विमिंग एसोसिएशन
मुद्दा- बिहार में स्विमिंग पुल की स्थिति

1.बिहार में स्विमिंग की क्या स्थिति है?

उत्तर:- बिहार में हमेशा से अच्छे तैराक हुए है। यहाँ के गंगा बेसिन में तैराकी सिख कर अच्छे – अच्छे तैराक हुए हैं। फिर भी यहाँ कुछ दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पहला मैदान, स्विमिंग के लिए खिलाड़ी तैयार करने के लिए उच्चस्तरीय स्विमिंग पूल की आवयश्कता है। यह हमारा दुर्भाग्य है पूरे बिहार में एक भी मानक स्विमिंग पूल नहीं है। यह जो आप सब जगह देखते हैं इसको बाथपुल कहा जाता है। स्विमिंग पूल के अलग मानक है।
दूसरी दिक्कत अच्छे शिक्षक अथवा कोच को लेकर है। यहाँ अच्छे कोच का नितांत अभाव है। बिहार सरकार के तरफ से  कोच को सुविधाएं प्रदान नहीं होती है। कोच यहाँ आने को तैयार भी होते है तो उन्हें सिखाने के लिए स्विमिंग पूल के नाम पर बाथपुल मिल जाता है।
यहाँ के तैराक नदियों में अभ्यास करते हैं। जबकि राष्ट्रीय स्तर पर जो तैराकी होती है वह स्विमिंग पूल में होती है। जिसका अभ्यास यहाँ के तैराकों को नहीं होता है। इसलिए वह अन्य राज्यों के मुकाबले पिछड़ जाते हैं।
1977 से बिहार हर साल अपनी टीम स्विमिंग की प्रतिस्पर्धा में भेजती है। लेकिन सरकार के उदासीन रवैये से स्थिति चिंताजनक है।
2.किन कारणों से हम स्विमिंग में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पिछड़ जाते हैं?

उत्तर:- गंगा बेल्ट में हमेशा से अच्छे तैराक पैदा हुए हैं। लेकिन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता स्विमिंग पूल में होने के कारण हम पिछड़ जाते हैं। उसके बाद अपने खिलाड़ियों के प्रति सरकार उदासीन रहती है। खिलाड़ियों को वह सुविधाएं नहीं मिल पाती है , जिनके वह हकदार है। गोपाल नाम का अंतराष्ट्रीय तैराक आज पटना के खजांची रोड में चाय बेचने को मजबूर है। उसके दुकान पर उसके सभी मेडल टंगे हुए हैं।
3.गोपाल जैसे अंतराष्ट्रीय तैराक और खिलाड़ियों को बचाने के लिए क्या करना चाहिए?

उत्तर:- बिहार सरकार का नियम है अगर कोई खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर मेडल मिलता है, तभी उसे नौकरी दी जाती है। 2017 में राष्ट्रीय स्तर पर के खिलाड़ी जिनका रैंक 1 से 4 के बीच को 5 लाख और कोच को 1 लाख मिलने की घोषणा की थी।
यहाँ के खिलाड़ियों को बाहर जाना मजबूरी है।
4.बिहार में स्विमिंग पूल को शुरू करने में किन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है?
उत्तर:- 30 दिसंबर 2007 में स्विमिंग पूल के लिए पाटलिपुत्र स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में नक्शा पास हुआ। पहले यह जमीन राज्य आवास बोर्ड के पास थी। 2009 में जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू हुई। बाद में वह जगह हमें प्राप्त भी हुई। पर उसमें भी एक अड़चन आ गयी। बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी एक कार्यक्रम में घोषणा कर के चले गए कि इस जगह में इंडोर गेम काम्प्लेक्स बने। उसके बाद उनके घोषणा को मूर्त्त रूप देने के लिए सब विभाग लग चुका है। 21.09.2017 में अरुण कुमार सिन्हा ने इस बात की जानकारी देने के लिए मुख्यमंत्री को पत्र भी लिखा। आज तक उस पत्र का कोई जवाब नहीं मिला।
5.स्विमिंग पूल के लिए क्या क्या मानक है?
उत्तर:- एफ.आई.एन.ए जो अंतराष्ट्रीय स्तर का स्विमिंग खेल आयोजित करवाती हैं। उनके हिसाब से 50मीटर × 25मीटर को उच्च मानक माना गया है। 10 लेन होने चाहिए हर लेन में 2.5 मीटर का फासला होना चाहिए।
इन सब मे फ्री स्टाइल, बैक स्ट्रोक, बटरफ्लाई, वाटर पोलो इन सब तरह की तैराकी की प्रतियोगिता होती हैं।
वार्ताकार – अभिलाष दत्ता

LEAVE A REPLY