जाने स्वदेशी का विचार किसने प्रस्तुत किया

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क्या गणेश वासुदेव जोशी स्वदेशी आन्दोलन विचार का केंद्र बिंदु थे?

पटना, 24 जुलाई : आज हम बात करेंगे ‘सार्वजनिक काका’ के नाम से प्रसिद्ध महान समाज सुधारक और सामाजिक कार्यकर्ता गणेश वासुदेव जोशी का. जिन्होंने भारत को “स्वदेशी” का विचार दिया.

गणेश वासुदेव जोशी का जन्म 20 जुलाई 1828 को महाराष्ट्र के सतारा में हुआ. पिता ईस्ट इंडिया कंपनी के कर्मचारी थे। किंतु उनका असमय ही निधन हो गया. उन्होंने मुख़्तार वकील की परीक्षा पास किया और पुणे में रहकर वकालत करने लगे. साथ ही उन्होंने सार्जनिक क्षेत्र में भी काम करना आरंभ किया. इस उद्देश्य से 1870 ई. में उन्होंने  ‘पुणे सार्वजनिक सभा’ की स्थापना की. इस सभा में उस समय के लगभग सभी प्रमुख व्यक्ति सम्मिलित हो गए.

महादेव गोविंद रानाडे भी इसके सदस्य थे. सभा का उद्देश्य जनता की कठिनाइयों की ओर अंग्रेज़ अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट करके उनके निवारण का प्रयत्न करना था. “सार्वजनिक सभा” को इस कार्य में काफ़ी हद तक सफलता भी मिली।

न्यायमूर्ति रानाडे से विचार-विमर्श कर 1872 में ‘स्वदेशी आंदोलन’ का श्री गणेश कर भारत को ‘स्वदेशी’ का विचार सबसे पहले प्रस्तुत किया.

उन्होंने ‘देशी व्यापारोत्तेजक मंडल’ की स्थापना कर स्याही, साबुन, मोमबत्ती आदि स्वदेशी वस्तुओं का उत्पादन करने को प्रोत्साहन दिया था। इसके लिए स्वयं आर्थिक हानि भी सही. इस स्वदेशी माल की बिक्री के लिए सहकारिता के सिद्धांत पर आधारित पुणे, सातारा, नागपूर, मुंबई, सुरत आदि स्थानों पर दुकाने प्रारंभ करने के लिए प्रोत्साहित किया. 12 जनवरी 1872 को उन्होंने खादी उपयोग में लाने की शपथ ली थी और उसे आजीवन निभाया। खादी का उपयोग कर उसका प्रचार-प्रसार करनेवाले वे पहले देशभक्त थे।

1876 के भयंकर अकाल में सरकार से सहायता प्राप्त करने में कामयाबी मिली। उनकी “सार्वजानिक सभा” के प्रयत्न से सरकार जागृति का आरंभ हुआ. 1885 में स्थापित कांग्रेस की स्थापना का नीव “सार्वजानिक सभा” के रूप में देश के सामने आ गई थी. इन सब कार्यों के कारण गणेश वासुदेव जोशी का नाम भी “सार्वजानिक काका” पड़ गया था। 52 वर्ष की उम्र में उन्होंने 24 जुलाई 1880 को दुनिया से विदा कह दिया.

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