बातचीत- शशिकांत फड़के, मुद्दा- विद्या भारती

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बातचीत- शशिकांत फड़के (क्षेत्रीय सह संगठन मंत्री- विद्या भारती )

मुद्दा- विद्या भारती

1.विद्या भारती संगठन क्या है? इसके क्या उद्देश्य हैं ?


उत्तर:- विद्या भारती, भारत में शिक्षा के क्षेत्र में सबसे बड़ी अशासकीय संस्था है। इसका पूरा नाम “विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान” है। इसके अन्तर्गत भारत में लगभग 18,000 शैक्षिक संस्थान कार्य कर रहे हैं। इसकी स्थापना सन् 1977 में हुई थी। विद्या भारती, शिक्षा के सभी स्तरों – प्राथमिक, माध्यमिक एवं उच्च पर कार्य कर रही है। इसके अलावा यह शिक्षा के क्षेत्र में अनुसंधान करती है। इसका अपना ही प्रकाशन विभाग है जो बहुमूल्य पुस्तकें, पत्रिकाएँ एवं शोध-पत्र प्रकाशित करता है।
विद्या भारती के तहत, 30000 शिक्षण संस्थान संचालित होते है। विद्या भारती शिशुवाटिका, प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, माध्यमिक, वरिष्ठ माध्यमिक, संस्कार केंद्र, एकल विद्यालय, पूर्ण एवं अर्द्ध आवासीय विद्यालय और महाविद्यालयों के छात्रों के लिए शिक्षा प्रदान करता है।
हमारा यह उद्देश्य है कि जिसके द्वारा हिंदुत्वनिष्ठ, राष्ट्र भक्त एवं सेवा भाव से यूक्त युवा पीढ़ी का निर्माण हो सके, ऐसी युवा पीढ़ी बौद्धिक एवं आध्यात्मिक दृष्टि से पूर्ण विकसित हो, जो अपने बांधवों को सामाजिक कुरीतियों, शोषण एवं अन्याय से मुक्त करा कर राष्ट्र जीवन को समरस, सुख, संपन्न एवं सुसंस्कृत बनाने के लिए समर्पित करना है।

2.विद्या भारती संगठन का बिहार राज्य में क्या उद्देश्य हैं?


उत्तर:- सामान्यतः सभी जनमानस इसे विद्या भारती के नाम से जानती है , पर इसका पूरा नाम “विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान” है ।  इसके अंतर्गत वह सभी कार्य जो विद्या भारती संगठन राष्ट्रीय स्तर पर करती है, वह सभी कार्य बिहार में भी सुचारू ढंग से चले यही हमारा उद्देश्य है। विद्या भारती संगठन को बिहार में दो भागों में बांटा गया है । दक्षिण बिहार और उत्तर बिहार । शिक्षा के मामले हम दो तरह से शिक्षा प्रदान करते हैं।
पहला, औपचारिक शिक्षा जिसके अंतर्गत सरस्वती विद्या मंदिर के विद्यालय आते हैं।
दूसर, अनौपचारिक शिक्षा जिसे सरस्वती संस्कार केंद्र कहा जाता है।

3.औपचारिक शिक्षा और अनौपचारिक शिक्षा में क्या अंतर है?


उत्तर:- औपचारिक शिक्षा में सरस्वती विद्या मंदिर की अवधारणा सामने आती है। यह हमारे संगठन के तरफ से बच्चों के लिए विद्यालय जैसी व्यवस्था प्रदान करते हैं। इसमें कक्षा प्रथम से लेकर कक्षा बारहवीं तक की पढ़ाई की व्यवस्था की जाती है । इसके लिए हमें राज्य बोर्ड से भी मान्यता प्राप्त है । साथ में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सी. बी.एस. ई ) से भी मान्यता प्राप्त है।
हमारे विद्यालयों में अंग्रेजी की भी पढ़ाई करवाई जाती है, लेकिन सिर्फ एक विषय के तौर पर। अंग्रेजी को हम सफलता का मानक नहीं मानते है। बच्चों में संस्कार का विकास हो इसके लिए हम संस्कृति भाषा नाम की   एक अलग से विषय पढ़ाते है। हमारे यहां पत्राचार पाठ्यक्रम ( फ्लाइंग स्टूडेंट )  की अवधारणा नहीं है। हम यह मानते है कि पढ़ाई के लिए विद्यालय ही उचित है।
विद्यार्थी जीवन में बच्चों का सम्पूर्ण विकास हो इसके लिए हम “क्रीड़ा जगत” भी करवाते हैं। जिसमें 56 खेलों को सम्मलित किया गया है। हमारे विद्यालय के बच्चें राष्ट्रीय स्तर तक खेल की प्रतिस्पर्धा में पहुँचे है।
सभी संस्कार पर्व हम सब विद्यालय प्रांगण में बड़े धूमधाम से मनाते हैं। उदहारण के तौर पर हर साल रक्षाबंधन का त्योहार हम विद्यालय के अंदर ही मनाते हैं।
ठीक इसी तरह हम हर साल 21 जून यानी कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को अपने विद्यालय में योग के साथ अलग – अलग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित करवाते हैं।
अनौपचारिक शिक्षा , को सरस्वती संस्कार केंद्र के नाम से जाना जाता है। सामान्यतः यह वैसी जगहों पर खोली गई है , जहाँ संसाधनों की कमी के कारण बच्चे विद्यालय नहीं जा पाते हैं। ऐसी जगहों पर हम केंद्र की स्थापना कर के रोजाना 2.5 घण्टे के सत्र के माध्यम से बच्चों को पढ़ाते है,  साथ में उन्हें आगे और पढ़ने के लिए हौसला बढ़ाते है।
हमारे संगठन का यही मानना है कि शिक्षा पर सभी बच्चों का सामान रूप से अधिकार है।

4.निजी विद्यालयों के मुकाबले सरस्वती विद्या मंदिर पीछे क्यों दिखाई देती हैं?


उत्तर:-ऐसा नहीं है 10वीं और 12वीं का परीक्षाफल हमारा ज्यादा बेहतर है। हमारे यहाँ आडम्बर नहीं है । इसलिए ऐसा दिखता है। लेकिन भीड़ नहीं होने का कुछ दूसरा कारण है ।इसका सबसे मुख्य कारण है आर्थिक पक्ष। प्राइवेट स्कूलों की तुलना में हमारा आर्थिक पक्ष कमजोर है। प्राइवेट स्कूल फ़ीस के नाम पर बच्चों के अभिभावकों को लुटती है। जबकि हमारे यहाँ फीस उनके तुलना में कम है। उनके पास बड़ी – बड़ी इमारतें है, जिनपर वह पानी की तरह पैसे बहाते हैं । वह अपने इमारतों से आकर्षण का भाव उत्पन्न करते है।
इमारतों के मामले में भी हम पीछे नज़र आते है। जगह की कमी के कारण हमारे ऐसे कई विद्यालय है जो कक्षा पाँच तक, या कहीं कक्षा आठ तक ही होती है। हमारे पास बारहवीं तक के लिए सीमित संख्या में ही विद्यालय मौजूद है।
दूसरा कारण है अंग्रेजी भाषा। प्राइवेट स्कूल में सब कुछ अंग्रेजी में ही होती है। अंग्रेजी को ही सफलता का सूचक मान लिया गया है। जबकि हमारे यहाँ अंग्रेजी को सिर्फ एक विषय के तौर पर पढ़ाई होती है।
संगठन और विद्यालय चलाने के लिए हम सरकार से अनुदान नहीं लेते हैं। समाज के सहयोग से हम काम करते हैं।

5.ऐसे बहुत से विद्यालय है, जिनका नाम सरस्वती विद्या मंदिर है , लेकिन वह विद्या मंदिर अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के अंतर्गत नहीं आती है। उनपर अनुशासनात्मक कार्यवाही क्यों नहीं होती है ?


उत्तर:-. हम उनपर चाह कर भी कोई कार्यवाही नहीं कर सकते हैं । क्योंकि हमनें सरस्वती विद्या मंदिर के नाम से कोई पंजीकरण नहीं करवाया है। इसलिए इस नाम का कोई भी इस्तेमाल कर सकता है।
हाँ, विद्या मंदिर अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान का पंजीकरण  हैं। हम भविष्य में ऐसी योजना पर विचार कर रहे हैं कि सरस्वती विद्या मंदिर का भी पंजीकरण करवाया जाए।

6.विद्या भारती संगठन, बिहार की भविष्य में क्या – क्या योजनाएं है?


उत्तर:- वह सभी विद्यालय , जहां सिर्फ कक्षा पाँच या कक्षा आठ तक ही पढ़ाई होती है, उन सभी जगह को बारहवीं तक कि पढ़ाई की व्यवस्था चालू हो सक। इसपर काम हो रहा है। इससे बच्चों को बार – बार जगह बदलने से होने वाली दिक्कतों से छुटकारा मिल सके।
अग्रिम तीन वर्षों में एक हज़ार से अधिक अनौपचारिक शिक्षा केंद्रों को स्थापित करना भी है।
वार्ताकार- अभिलाष दत्ता

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