बातचीत – दीपक चौरसिया, मुद्दा – सहकारिता

0
SHARE
दीपक चौरसिया

बातचीत – दीपक चौरसिया ( बिहार प्रदेश अध्य्क्ष , सहकार भारती )

मुद्दा – सहकारिता

1. सहकारिता का अर्थ क्या है ?


उत्तर:- सहकारिता, दो शब्दों से मिल कर बना है सह + कार। इसका अर्थ हुआ कि मिल जुल कर काम करना। मतलब सहयोग से ही सामाजिक जीवन के कार्यों को करना और  इसकी शुरुआत अनादि काल से तब जब मनुष्य की उत्पत्ति हुई थी। जब से जग समूह में मिल कर काम क्रिया जाना , तब सहकारिता का जन्म हुआ।
इसको विशुद्ध रूप में यह कह सकते है जब कोई संस्था, कोई समूह कोई आर्थिक क्षेत्र से सम्बंधित कार्य को लोकतांत्रिक पद्धति के आधार पर किया जाता है। सभी सदस्य आर्थिक उद्यम से अपना आर्थिक सहभाग हिस्सा के द्वारा करते हैं। और फिर किये गए उद्यम से वर्ष प्राप्त लाभ का कुछ अंश, लाभांश डिविडेंड सदस्यों में उनकी हिस्सा पूंजी के अनुसार मिलता है।
सहकारिता से तीन चीज़ों की बचत होती है :-
क. समय की बचत
                      ख.  पूंजी की बचत
                      ग.  मेहनत की बचत

2. सहकार भारती क्या है? इसका उद्देश्य क्या है?


उत्तर:- सहकार भारती विशुद्ध रूप से गैर राजनीतिक संगठन है। इसकी शुरुआत 1978 में हुई थी, 1989 में इसका पंजीकरण हुआ। इसके प्रथम अध्यक्ष स्वर्गीय माधव राव बोड़बोले जी थे । इस संगठन का मुख्य उद्देश्य है कि सहकारिता को मजबूत स्थिति में लाने का कार्य करना।  सहकारिता के क्षेत्र में जो विशुद्धियाँ व्याप्त है, उनका शुद्धिकरण किया जा सके। सहकार भारती के कुछ मुख्य कामों में से एक काम यह भी कि सरकार के तरफ से सहकारिता क्षेत्र में जो योजना लागू है या नयी योजना आयी है उसकी जानकारी संस्था जनता तक पहुँचाती  हैं। सहकार भारती के माध्यम नवीनतम तकनीक की जानकारी सहकारिता क्षेत्र में जुड़े लोग को प्रदान करती है। इसके अलावा प्रशिक्षण वर्ग का आयोजन करवाना । सहकार भारती संगठन के द्वारा तीन पत्रिकाएं निकलती है, इन सभी का एक ही उद्देश्य है कि सहकारिता क्षेत्र में जुड़े लोगों को और आगे बढ़ने में मदद करना ।

3. वर्तमान में सहकार भारती की बिहार में क्या स्थिति है ?


उत्तर:- आज बिहार में,  सहकारिता की स्थिति चिंताजनक है। यह क्षेत्र अभी पिछड़ा हुआ है। बिहार में 80 के कालखंड में इस क्षेत्र में एक अच्छी पहल दिखाई दी थी। उस वक़्त प्रचार प्रसार बहुत हुआ था, नयी नयी कॉपरेटिव खुले। लेकिन वह सभी व्यक्तिवाद से ग्रसित था, इस कारण वह समय के साथ बन्द होने के कगार पर पहुँच गए। उनमें से कुछ तो बन्द भी हो गए। इस कारण सहकारिता से लोगों का विश्वास दिन प्रतिदिन कम होते चला गया। इसी स्थिति को सुधारने के लिए सहकार भारती वर्तमान समय मे काम कर रही है। अभी हाल में हमलोग सहकारिता मंत्री से मिले। वर्त्तमान में सहकार भारती का 22 जिलों में अपना कार्य सुचारू रूप से चल रहा है। हमारा लक्ष्य है नवंबर तक बिहार के सभी 38 जिलों तक संगठन का विस्तार हो जाए। अभी वर्तमान में दो क्रेडिट सोसाइटी चल रही है। सात – आठ पंजीकरण प्रक्रिया में लगी हुई है। सरकारी देरी के कारण यह सात – आठ सोसाइटी अभी तक पंजीकृत नहीं हो सकी है।

4. सहकारिता का क्षेत्र, चिटफण्ड और कंपनी से कैसे अलग है ?


उत्तर:- देखिए चिटफण्ड के बारे में किसी से कुछ भी छिपा हुआ नहीं है, वह आज न कल जनता के पैसों को लेकर भागेगी ही। उनका कोई भरोसा नहीं। अब आते है कंपनी पर, सभी कंपनियों पर व्यक्ति प्रधानता हावी रहती है। इससे फैसले प्रभावित होते है, पर जब बात करे सहकारिता की तो इसमें सभी के फैसलों का सम्मान होता है। लोकतांत्रिक पद्धिति को ध्यान में रखते हुए मिल-जुल कर राष्ट्रीय भाव से काम करना ही सहकारिता है। सदस्यों की पूंजी सदस्यों के लिए ही काम में आती है।
  वार्ताकार – अभिलाष दत्ता

LEAVE A REPLY